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कोयला खदानों से बढ़ता वायु प्रदूषण: गंभीर बीमारियों का खतरा, रोकथाम के सरल उपाय सुझाए ,अभ्युदय सिंह (डैनी)।~~~~~~

कुलदीप सिंह (सन्नी)

BK-NEWS/सिंगरौली/मोरवा:- कोयले की खदानों से निकलने वाले धूल कणों और प्रदूषकों के कारण आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर होता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, खदान क्षेत्रों में बढ़ते PM2.5 और PM10 स्तर श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियों, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों के संक्रमण और यहां तक कि जानलेवा रोगों का कारण बन सकते हैं। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के उच्च स्तर से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को सबसे अधिक खतरा होता है।

इन खतरों को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अभ्युदय सिंह ने प्रदूषण नियंत्रण और बचाव के लिए कुछ सरल एवं प्रभावी उपाय सुझाए हैं। उनका कहना है कि यदि सही तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति से उपाय अपनाए जाएं तो धूल कणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

नमी आधारित दमन सबसे प्रभावी उपाय

अभ्युदय सिंह ने बताया कि AQI को कम करने के लिए विशेष रूप से PM2.5 और PM10 कणों को नियंत्रित करना जरूरी है। इसके लिए वातावरण में नमी आधारित दमन (पानी का छिड़काव) सबसे प्रभावी तरीका है। पानी की बारीक बूंदें धूल कणों से चिपककर उनका वजन बढ़ा देती हैं, जिससे वे जमीन पर बैठ जाते हैं।

बाहरी और बड़े पैमाने पर धूल नियंत्रण के उपाय

एटोमाइज्ड वॉटर मिस्ट/फॉग कैनन: उच्च दबाव से छोड़ी गई बारीक पानी की बूंदें धूल कणों के समान आकार की होती हैं और उन्हें तुरंत नीचे गिरा देती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि फॉग कैनन को 45 डिग्री ऊपर की ओर लगाया जाए तथा प्रेशर इतना हो कि पानी की बूंदें 10–20 मीटर ऊंचाई तक पहुंच सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि एनसीएल (NCL) द्वारा इनका उपयोग तो किया जाता है, लेकिन निर्धारित वैज्ञानिक मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है।

एंटी-स्मॉग गन: निर्माण स्थलों और अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों में स्वचालित गन के माध्यम से नियमित पानी का छिड़काव कर धूल को उड़ने से पहले ही नियंत्रित किया जा सकता है।

रासायनिक धूल अवरोधक: कच्ची सड़कों और भंडारण स्थलों पर पर्यावरण अनुकूल बाइंडर का छिड़काव धूल उड़ने से रोकता है।

हरित पट्टियां: पेड़-पौधे प्राकृतिक फिल्टर का कार्य करते हैं। इनके पत्ते धूल कणों को रोकते हैं और हवा की गति कम करते हैं।

घर के अंदर अपनाएं ये उपाय

HEPA एयर प्यूरीफायर: ये 99.97% तक महीन कणों को फिल्टर कर लेते हैं, जिससे घर के अंदर की हवा सुरक्षित रहती है।

नम सफाई: झाड़ू के बजाय गीले कपड़े या माइक्रोफाइबर मोप से सफाई करने से धूल दोबारा हवा में नहीं उड़ती।

HEPA वैक्यूम क्लीनर: नियमित वैक्यूमिंग से महीन कण कमरे में फैलने के बजाय फिल्टर में ही फंस जाते हैं।

स्रोत नियंत्रण भी जरूरी

•प्रदूषण के चरम समय (सुबह और शाम) में खिड़कियां बंद रखें।

•घर में जूते बाहर ही उतारें।

•निर्माण सामग्री जैसे रेत और सीमेंट को ढककर रखें।

अभ्युदय सिंह ने कहा कि सर्वोत्तम परिणाम के लिए रोजाना नम सफाई, बेडरूम में 24 घंटे HEPA वायु शोधन और आसपास की कच्ची जमीन पर नियमित पानी का छिड़काव एक साथ किया जाना चाहिए।

उन्होंने प्रशासन और खनन कंपनियों से अपील की कि वैज्ञानिक तरीकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि खदान क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके।

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