
बढ़ता कारवाँ/ सिंगरौली/ब्यूरो कार्यालय) इन दिनों अगर अवैध रेत कारोबार की बात की जाए तो एक दर्जन से ज्यादा ट्रैक्टर खुटार चौकी क्षेत्र के काजन,कटौली,पिपरा झांपी,डिग्घी,गडहरा से रात भर फर्राटे भर रहे हैं।ये ट्रैक्टर रात 7 बजे से अवैध रेत परिवहन में संलिप्त हो जाते है जो सुबह 10 बजे तक बिना रोक टोक के धड़ल्ले से चलते है । रेत लोड इन

ट्रैक्टरों की तरफ्तार इतनी तेज होती है कि अगर कोई इनके सामने आ जाये तो उनका भी हाल हाल ही में मृतक नीरज दुबे की तरफ हो जाये और फिर किसी बेकसूर को पुलिस द्वारा संरक्षण प्राप्त ये रेत चोर अपने ट्रैक्टरों के चक्का से रौंदते हुए निकल जाए।क्योंकि उन्हें पता है कि उन पर कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति कर संरक्षण देने वाले लोग इन रेत चोरों को बचा ले जायेंगे।लेकिन जिनके घर का चिराग ये रेत चोर बुझा देते हैं उनका क्या?

वही रेत चोर पूरी रात रेत चोरी व बिक्री करते हैं।वही चंद खाकी वाले अवैध रेत को संरक्षण देने का काम करते हैं।उसके बदले रेत चोरों के द्वारा उन्हें हर माह अच्छा खासा चढ़ोत्तरी की जाती है।अपराध पर अंकुश लगाने व आम जनता की सुरक्षा का जिम्मा के लिए जिन्हें सरकार सैलरी देती है उसमें से चंद लोगों का पेट शायद सरकार द्वारा दी जा रही सैलरी से नही भरती शायद इसलिए वो लोग थाना चौकी क्षेत्र में रेत चोरी करवाने,जगह जगह कोचिया शराब बेचवाने,कबाड़ को बढ़ावा देना जैसे कार्यो को में संलिप्त हो जाते हैं।

सूत्रों की माने तो काफी लंबे समय से खुटार चौकी क्षेत्र में अवैध रेत व कोचिया शराब व कबाड़ को लेकर चौकी के एक एएसआई सहित एक बाहरी व्यक्ति जितेन्द्र की चर्चा जोरों पर है।लेकिन इसके बावजूद पुलिस के आलाधिकारी इन पर कार्यवाही के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं
खुटार चौकी क्षेत्र में काजन,कटौली,पिपरा झांपी व डिग्घी,चितरबई कला से सबसे ज्यादा रेत चोरी की घटना को अंजाम दिया जा रहा है। दर्जन से ज्यादा ट्रैक्टर पूरी रात फर्राटे भरते हैं लेकिन कोई मजाल की इन पर कार्यवाही खुटार चौकी कर सके। कार्यवाही के लिये उच्च अधिकारियों को आना पड़ता है वही सूत्रों की माने तो 25000 रुपये प्रति ट्रैक्टर सुबिधा शुल्क रेत चोरी के एवज में चढ़ोत्तरी की जाती है
इनका सूत्र इतना होशियार है कि पुलिस के आलाधिकारियों व खनिज विभाग की कार्यवाही से पहले ही चौकी को भनक लग जाती है और रेत माफिया ट्रैक्टर छापा मार कार्यवाही के लिए निकले टीम से पहले ही रफू चक्कर हो जाते हैं। अगर इतना ही अपराध रोकने में मुखविर का इस्तेमाल खुटार पुलिस करती तो क्षेत्र की हत्या और कई चोरियों का खुलाशा हो जाता।
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