सिंगरौली के प्रथम विधायक पं. श्यामकार्तिक दुबे की 08 वीं पुण्यतिथि कल
बिहरा में 16 जून को अंतर्राष्ट्रीय कलाकार मिश्र बंधुओं द्वारा दी जायेगी सुन्दरकाण्ड व भजनों की प्रस्तुति

बढ़ता कारवां/सिंगरौली (जमुना सोनी) बैढ़न सिंगरौली के प्रथम विधायक व 1947 में भारत की आजादी के समय से लेकर तीन दशक तक सिंगरौली परिक्षेत्र की राजनीतिक आन्दोलन के प्रेरणाश्रोत रहे स्व. पं. श्यामकार्तिक दुबे जी की 08 वीं पुण्यतिथि पर 16 जून को उनके गृह ग्राम बिहरा स्थित निज निवास पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है ।
वही इस दौरान पण्डित जी के परिजनों द्वारा क्षेत्र के राजनीतिक व सामाजिक प्रतिनिधियों सहित तमाम सिंगरौलीवासियों को आमंत्रित किया गया है और वही पुण्यतिथि पर दोपहर 1 बजे से श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है इसके पश्चात अंतर्राष्ट्रीय कलाकार मिश्र बंधुओं द्वारा सुन्दर काण्ड पाठ एवं मनमोहक भजनों की प्रस्तुति दी जायेगी और वही इसके बाद सहभोज की भी व्यवस्था की गयी है ।
सिंगरौली के राजनैतिक क्षितिज मे भीष्म पितामह का दर्जा रखने वाले प्रथम विधायक पंडित जी के नाम से प्रसिद्ध पं श्याम कार्तिक दुबे ने 96 वर्ष की उम्र में 16 जून 2015 को अपने सिंगरौलीवासियों को अलविदा कह दिया था।
ज्ञात हो कि स्व. पं. श्यामकार्तिक दुबे ने 5 बार सिंगरौली का प्रतिनिधित्व किया था और वही 1948 से 1952 के मध्य विंध्यप्रदेश विधान सभा मण्डल में महाराजा रीवा की एडवाइयजरी कमेटी के सदस्य के पद को मिलाकर पं. श्याम कार्तिक 52-57, 57-62, 62-67 के मध्य सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी के रूप में लगातार 4 सत्र एवं सन 72-77 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित हो मध्यप्रदेश विधान सभा में सिंगरौली का प्रतिनिधित्व किया और वही सन 48 से लेकर 77 तक अपनी हुंकार से विधान सभा को हिला देने वाले एवं विरोधियों के छक्के छुड़ा देने वाले 96 वर्षीय बुजुर्गवार नेता ने सिंगरौली के राजनीतिक पतन एवं यहां बढ़ती पूंजीवादी संस्कृति पर तल्ख होते हुये कहा था कि यहां के नेताओं की सबसे बड़ी कमजोरी इच्छा शक्ति की कमी है और यदि बुजुर्ग होने की हैसियत से सीख देने के अंदाज में स्पष्ट कहूँ तो यहां के नेता गांव-गिराव में सरपंची लायक भी नहीं हैं और ये सब भोपाल-दिल्ली में क्या करते होगें ?
डा. राम मनोहर लोहिया, राजनारायण सिंह जैसे नेताओं के अत्यंत करीबी रहे पं. श्याम कार्तिक ने सिंगरौली को सोने की चिड़िया निरूपित करते हुये कहा था कि उद्योगपतियों की गिद्ध दृष्टि इस पर लगी हुई है जिसने यहां कि प्राकृतिक संपदाओं को लूटना भी शुरू कर दिया है और यहां का नौजवान यदि इसे संभाल ले तो वह राज कर सकता है परंतु संभाल ले तब ?
पं. श्याम कार्तिक की नजर मे तब भी अपनी खनिज संपदाओं की बदौलत सिंगरौली भारत में ऊर्जा राजधानी बनने की हैसियत रखती थी और कहते थे कि बोलचाल की भाषा में तो इसे स्थानीय लोगों द्वारा यह दर्जा दिया जाने लगा है परंतु इससे काम नहीं चलने वाला है जरूरत है देश की राजधानी दिल्ली, प्रदेश की राजधानी भोपाल, देश की आर्थिक राजधानी मुुंबई की तरह इसे ऊर्जाधानी के रूप में अधिकृत रूप से दर्जा दिये जाने की। चुप बैठकर इसे यह दर्जा और सुविधा नहीं दिलायी जा सकती और वही जरूरत है इस बात कि प्रत्येक सिंगरौलीवासी के मुंह से यह मांग निकलनी शुरू हो जाये जिसकी गूँज दिल्ली में सत्ता के गलियारों को हिला के रख दे ।
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