HS-NEWS (मध्य प्रदेश) सिंगरौली/राजकुमार सिंह (आरपी सोनी):- केन्द्र सरकार द्वारा पारित कॉरपोरेट परस्त व किसान,कृषि और आम उपभोक्ता विरोधी कानून के खिलाफ जारी शांतिपूर्ण किसान आन्दोलन 26 जनवरी के आते आते और भी व्यापक होते गया इसकी व्यापकता यह है कि 25 तारीख के शाम तक ही सिंघु, टिकरी, गाजीपुर, शाहजहांपुर, पलवल जैसे दिल्ली सीमाओं पर पांच लाख से अधिक की संख्या में ट्रैक्टर 26 जनवरी के ट्रैक्टर रैली में शामिल होने पहुंच चुके थे साथ ही परेड में शामिल होने ट्रैक्टरों में किसानों के अलावा करोड़ो की तादात में आम जन सैलाब उमड़ पड़ी वही किसान परेड में शामिल होने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, के अलावा छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, गुजरात, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, महाराष्ट्र, सहित देश भर के किसान पहुंच कर केंद्र सरकार के उस दावे का जवाब दिया जो कह रहा था कि यह केवल पंजाब हरियाणा के कुछ भ्रमित किसानों का आंदोलन है

शांतिपूर्ण किसान आंदोलन में हुए घटना और पुलिस गोलीचालन में शहीद हुए किसान परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के छत्तीसगढ़ प्रदेश उपाध्यक्ष मदन लाल साहू एवं सचिव तेजराम विद्रोही ने बयान जारी कर कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा शांतिपूर्ण रूप से जारी किसान आंदोलन को बदनाम कर उसे तोड़ने का प्रयास लगातार किया गया है ट्रैक्टर रैली के दौरान हुए घटनाओं को गोदी मीडिया द्वारा लगातार दिखाया जा रहा है लेकिन दिल्ली की जनता ने रास्तों पर पुष्प वर्षा कर किसानों का स्वागत किया यह नहीं दिखाया जा रहा है केन्द्र सरकार द्वारा कॉरपोरेट घरानों के हित में लाये गए कानून के खिलाफ केवल किसानों में ही नहीं आम उपभोक्ताओं में नाराजगी देखी जा सकती है साथ ही आंदोलन से जुड़ी जनता ने संघी कॉरपोरेट फॉसिस्टों को अपनी ताकत दिखाई है यह आंदोलन, तीन काले क़ानूनों के वापस होने तक जारी रहेगा
दिल्ली सीमाओं पर आंदोलन का नेतृत्वकर्ता किसान नेताओं ने आह्वान किया था कि आज तक देश में गणतंत्र दिवस पर इस देश के गण यानी कि हम लोगों ने कभी इस तरह परेड नहीं निकाली है हमे इस परेड के जरिए देश और दुनिया को अपना दुख दर्द दिखाना है, तीनों किसान विरोधी कानूनों की सच्चाई को बताना है हमें ध्यान रखना है कि इस ऐतिहासिक परेड में किसी किस्म का धब्बा ना लगने पाए परेड शांति पूर्वक और बिना किसी वारदात के पूरी हो इसमें हमारी जीत है याद रखिए, हम दिल्ली को जीतने नहीं जा रहे हैं, हम देश की जनता का दिल जीतने जा रहे हैं किसान नेताओं द्वारा इस तरह लगातार सावधानी बरतने लगातार प्रयास किया गया लेकिन सरकार द्वारा इस बात को दरकिनार किया गया जिसमें कथित रूप से भाजपा प्रदेश कार्यालय द्वारा 15 जनवरी को जारी पत्र में किसान रैली को असफल करने व किसी भी कार्यवाही न होने की बात कही गई थी किसान नेताओं को मारने की सुपारी लेने वाले व्यक्ति के गिरफ्तारी के बाद सरकार की क्या जिम्मेदारी बनती है, इस पहलू पर कितना ध्यान दिया गया किसानों को यदि आक्रोशित होना था वह दो महीने तक शांतिपूर्ण आंदोलन में नहीं रहते इसी शांतिपूर्ण आंदोलन को भाजपा की केंद्र सरकार बदनाम कर तोड़ना चाहती है क्योंकि दिल्ली पुलिस द्वारा बैरिकेट हटाने की बात कही गई थी जो नहीं हटाया और जहां रूट तय किया था वही पर भी कच्ची बैरिकेट और लगा दिया गया कुल मिलाकर शासन प्रशासन द्वारा ही किसानों को दिग्भ्रमित किया गया।
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