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नौनिहालों को आपदा में मत डालो: पिछले दरवाजे से स्कूल खोलने का फैसला वापिस लो- CPI

बढ़ता कारवाँ/ब्यरो कार्यालय सिंगरौली मध्य प्रदेश

बढ़ता कारवाँ/सिंगरौली, 20 सितम्बर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की मध्यप्रदेश इकाई ने शिक्षकों की सलाह लेने के नाम पर शालाओं को 21 तारिख से खोलने के फैसले का विरोध करते हुए इसे तुरंत वापिस लेने की मांग की है. पार्टी का स्पष्ट मानना है कि अभी कोरोना की महामारी अपने चरम पर है और इस समय बच्चों को शालाओं में बुलाने का फैसला उन्हें बेवजह संकट में डालने वाला साबित हो सकता है. इसलिए बेहतर यही होगा कि फ़िलहाल इस फैसले को टाल दिया जाए जब तक कि हालात अनुकूल नहीं हो जाते.

सीपीआई के राज्य परिषद सदस्य कामरेड संजय नामदेव ने प्रेस को जारी एक बयान में कहा कि विगत एक माह से देश में कोरोना का संकट बहुत तेजी से बढ़ रहा है और प्रतिदिन एक लाख के करीब संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं और अह पूरी दुनिया में आने वाले मामलों का तकरीबन आधा है. अर्थात दुनिया भर में नए संक्रमित होने वाले लोगों में हर दूसरा मरीज भारत से है. प्रतिदिन होने वाली मौतों की संख्या भी अचानक से बहुत बढ़ गई है. पहले से ही संकट में पड़ी देश की स्वास्थ्य सेवाए मरीजों की बढती संख्या को संभल पाने में असमर्थ दिखाई दे रही हैं. हर दिन कहीं न कहीं से इस तरह के विचलित कर देने वाले समाचार भी समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रहे हैं.

संक्रमण की स्थिति इस कदर भयभीत करने वाली है की मध्यप्रदेश के हाई कोर्ट को फ़िलहाल बंद कर दिया गया है और विधानसभा के सत्र को एक दिन का कर दिया गया है. संसद के सत्र की अवधि भी घटाने के समाचार मिल रहे हैं. ऐसे अवसर पर बच्चो के लिए स्कूल खोल देने का फैसला बहुत ही अविवेक और असंवेदनशीलता का प्रमाण है. कहीं हम बच्चों के जीवन को विधायको और सांसदों से कम कीमती तो नहीं मान रहे हैं . उस पर भी आपत्तिजनक बात है कि बच्चों के स्कूल जाने के लिए अभिभावकों के ऊपर सहमती पत्र प्रदान करने का दवाब बनाया जा रहा है. अर्थात कोई दिक्कत होने पर शाला प्रबंधन अपनी जिम्मेवारी से बचकर सारा दोष पालको पर डालकर साफ़ बच जाएगा.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी इस कदम की आलोचना करती है और सरकार से आग्रह करती है कि वह अपने इस फैसले को प्रदेश के बच्चों के वापक हित में वापिस ले. अह बात सही है कि ऑनलाइन शिक्षा भिकोई सशक्त विकल्प नहीं है इसलिए वर्तमान सत्र के बारे में प्रभावशाली फैसला लेने के लिए शिक्षाविदों और छात्र-शिक्षक संगठनों की एक समिति बनाकर उसकी अनुशंसाओं के आधार पर आगामी कदम उठाए.
प्रकाशनार्थ
भवदीय
संजय नामदेव
राज्य परिषदसदस्य,
सीपीआई मध्य प्रदेश

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