बढ़ता कारवाँ/ब्यरो कार्यालय सिंगरौली
बढ़ता कारवाँ/सिंगरौली/मोदी सरकार द्वारा लाया गया किसान सुधार बिल ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह परिणाम देने वाला है जिस तरह से ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा किसानों को नील, चाय ,आदि कंपनी हित के मुताबिक खेती करने के लिए मजबूर किया जाता था उसी तरह पार्टी विशेष कि सरकार अपने विशेष उद्योगपति दोस्तों को लाभ पहुंचाने के लिए यह विधेयक लाया गया है कारपोरेट जगत को अपने द्वारा तय किए गए मूल्य , अनाज विशेष क्रय करने की प्राथमिकता , असीमित भंडारण ,करने के अधिकार की वजह से कालाबाजारी बढ़ेगी ,

खरीद तथा बिक्री के मूल्य निर्धारण में अधिकार कारपोरेट जगत के पास होंगे तो किसान से ओने पौने दाम में क्रय होगा और असीमित भंडारण के अधिकार के वजह से वही अनाज, सब्जी ,फल ,दूध बाजार में उपभोक्ताओं को महंगे दर पर उपलब्ध होंगे, दूसरी बात देश में प्रत्येक राज्य की कृषि उत्पादन दर में काफी असमानता होती है ,विकसित राज्यों से ही यदि कारपोरेट जगत पर्याप्त मात्रा में उत्पादन संग्रहण कर लिया तो कम विकसित राज्य के किसानों को उत्पादन का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा क्योंकि मंडी व्यवस्था धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी ,कृषि का पूरा नियंत्रण ,टेलीकॉम विभाग की तरह होगा, कृषि विभाग का भी नियंत्रण कुछ चुनिंदा सत्ता के गलियारों के मित्रों के पास ही रहेगी मंडी का भी वही हाल होगा जिस तरह से बीएसएनल का हुआ है जगह-जगह विशेष कारपोरेट का अपना कोल्ड स्टोरेज होगा वहीं से विशेष कंपनी के मोबाइल सिम की तरह अनाज ,दूध ,फल इत्यादि खाद्य सामग्री उनके द्वारा तय मूल्य पर उपभोक्ता खरीदने पर मजबूर होगा इस तरह किसान को उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा और वहीं उपभोक्ताओं को भी महंगी कीमत चुकानी पड़ेगी और बिचौलिए भारी मात्रा में लाभ कमाएंगे यह व्यवस्था जब देश में ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन था तब लागू था, उक्त आरोप लगाते हुए प्रवक्ता जिला कांग्रेस कमेटी एवं पूर्व विधायक के प्रतिनिधि अभिमन्यु देव चंदेल ने आरोप लगाया कि किसान बिल उपभोक्ता एवं किसान विरोधी है और किसान हित में इसे वापस लेना चाहिए
बढ़ता कारवाँ | समाजवाद की ओर बढ़ते कदम… India's #1 Leading News Portal