ग्वालियर-
पहली बार रेत के कारोबार में अपनी किस्मत आजमाने उतरी एमपी सेल्स कंपनी को कोई अनुभव नहीं था। ठेका लिया और काम शुरू करने निकले। अपने अपने परिचितों और क्षेत्र के प्रभावी लोगों को रेत उत्खनन का ठेका दे डाला और बदले में कुछ हाथ नहीं लगा। नई कंपनी और कोई अनुभव न होने का का सबसे बड़ा फायदा खनिज विभाग के सिस्टम और उन दबंगों को मिला जिन्होने कभी रेत का कारोबार नियम से किया ही नहीं। नया ठेका होने के बाद से रेत कारोबार में हर नियम टूटते गए और पूरा सिस्टम ही बिगड़ गया। प्रशासन,पुलिस और खनिज विभाग को हर सही गलत का अंदाजा था लेकिन जिस-जिस को फायदा दिखा वह चुप रहा। रेत कारोबार का ठेका लेने वाले वाली कंपनी ने अब दावा किया है कि दूसरों को रेत का काम देकर ठीक नहीं हुआ,अब खुद ही अपने स्तर पर पूरा काम संभालेगी।
ज्ञात रहे कि ग्वालियर जिले में रेत का ठेका लेने वाली कंपनी एमपी सेल्स है जो कि मुरैना के रहने वाले तेल कारोबारी मनोज अग्रवाल के नाम है। एक तरह से अधिकारिक रूप से मनोज अग्रवाल ही रेत के ठेकेदार हैं,वहीं इन्होने रेत ठेके में अपना नॉमिनी आशुतोष माहेश्वरी को बनाया है जो कि मनोज अग्रवाल के खास मित्र के बड़े भाई हैं। कंपनी रेत ठेके की शर्तों के अनुसार एग्रीमेंट भी कर चुकी है। ठेका कुल 30 करोड़ का है जिसमें अतिरिक्त स्टांप डयूटी व अन्य शुल्क भी रहते हैं।
नई कंपनीः सरकार को चपत और माफिया की कमाई ऐसे
रेत का कारोबार पहली बार संभालने वाली कंपनी को काम का अनुभव तो था नहीं। ऐसे में कंपनी ने अपने भरोसे के दावे वाले लोगों को रेत की अलग अलग खदानें देना शुरू कीं जिससे बैठे बिठाए पैसा आता रहे और रेत का कारोबार भी चलता रहे। यहां ऐसा हुआ नहीं और जिन शर्तों के साथ खदानें दी गई न शर्त पूरी हुईं न पैसा आना शुरू हुआ। ऐसे फिर कंपनी अपने लोगों को हटाती गई। जिन लोगों ने कंपनी से खदानें चलाने को लीं उन्होने सब जगह यह फैला दिया कि खदानें उनकी ही हैं,कोई कंपनी नहीं है और फिर दूसरों को खदानें टिकाईं। इन खदानों से रेत तो निकली लेकिन सरकार को रॉयल्टी और कंपनी को पैसा नहीं मिला। कंपनी के दूसरों को ठेका देने की आड़ में जमकर अवैध उत्खनन हुआ। सीधी बात सरकार को चपत लगी और माफिया की कमाई और बढ़ गई।
अब कंपनी का दावाः खुद करेंगे पूरा काम
रेत के कारोबार को अब आगे अपने स्तर पर चलाने का दावा कंपनी ने किया है। कंपनी का कहना है कि किसी भी तरह दूसरों का कोई दखल नहीं रहेगा। वहीं दूसरी बात यह कि कंपनी को खुद रेत का काम पूरा संभालने के लिए बड़ा होमवर्क करना होगा,अभी तक की स्थिति में जिस तरह ठेका होने के बाद भी रेत की खदानों से अवैध उत्खनन हो रहा है,यह कंपनी से लेकर पूरे सिस्टम का मजाक जैसा ही है।
यह है स्वीकृत खदानों की स्थिति
लिधोरा- 13 हेक्टेयर
गजापुर-12 हेक्टेयर
बाबूपुर-18 हेक्टेयर
बसई-17 हेक्टेयर
गधोटा-17 हेक्टेयर
सिली-4 हेक्टेयर
पुटटी-4 हेक्टेयर
सेमरी-4 हेक्टेयर
रायपुर-5 हेक्टेयर
बेलगढ़ा-12 हेक्टेयर
किसके चले टोकन,कंपनी बोली-फर्जी छपे
रेत कारोबार में पार्टनर आशुतोष माहेश्वरी के पिछले दिनों वायरल हुए वीडियो के बाद रेत कारोबार के कुछ टोकन सामने आए थे। इन टोकनों को लेकर कंपनी का कहना है कि कभी उन्होने कोई टोकन नहीं छपवाए। यह टोकन जयभोले नाथ नाम से थे जिनपर रेत वाहनों के नाम लिखे रहते थे। कंपनी के अनुसार यह स्थानीय स्तर पर अवैध कारोबार करने वालों ने छपवाए क्यों कि यह अलग अलग तरह के थे।
कंपनी खुद चलाएगी काम
प्रतिबंध हटने के बाद अब कंपनी खुद अपना काम करेगी। सभी नियमों के साथ पूरी मॉनिटरिंग करके रेत कारोबार किया जाएगा। दूसरों को काम देने और स्थानीय प्रभावी लोगों के कारण कार्य में व्यवधान आया। पुलिस सहयोग के साथ आगे अब कंपनी स्तर पर काम किया जाएगा।
मनोज अग्रवाल,ठेकेदार,एमपी सेल्स
बढ़ता कारवाँ | समाजवाद की ओर बढ़ते कदम… India's #1 Leading News Portal