ग्वालियर- 5 लाख के इनामी क्रूर अपराधी विकास दुबे जैसे कई एनकाउंटरों की अंचल की धरती साक्षी रही है। पुलिस मुठभेड़ों का जनक ग्वालियर-चंबल अंचल को माना जाता है। मुठभेड़ की झूठी-सच्ची कहानी यहीं गढ़ी जाती थी। अंचल में एनकाउंटर एक्सपर्ट माने जाने वाले रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों का मानना है कि किसी निर्दोष की जान जाए या फिर अपराधी की, उसकी मौत पर सवाल उठना चाहिए। क्योंकि पुलिस को न्याय करने का अधिकार संविधान ने भी नहीं दिया है, लेकिन संविधान ने आत्मरक्षा का अधिकार हर नागरिक को दिया है। संविधान की यही व्यवस्था पुलिस का कवच साबित होती है। विकास दुबे जैसे कई एनकाउंटर चर्चित रहे हैं। भंवरपुरा नरसंहार को अंजाम देने वाले गड़रिया बंधुओं के एनकाउंटर में मारे जाने पर भी संदेह जताया था। धर्मेंद्र कुशवाह के एनकाउंटर को भी लोग नहीं भूले हैं। धर्मेंद्र के खिलाफ देश के किसी थाने में साधारण मारपीट का मामला भी दर्ज नहीं था, उसे पुलिस ने गैंगस्टर का साथी बताकर मार दिया। न्यायिक जांच हुई, लेकिन वह जांच सरकार के पास जमा होकर रह गई।
अंचल के चर्चित एनकाउंटर-
– 5 लाख से अधिक के इनामी दयाराम-रामबाबू गड़रिया गैंग का अंत (भंवरपुरा नरसंहार को अंजाम दिया)
– डकैत पप्पू गुर्जर, प्रेमा काछी, बदना बंजरा, हरि बाबा, हजरत रावत, जगजीवन परिहार प्रमुख हैं।
-शहरी बदमाशः सोबरन काना, आजाद, अशोक सिंधी, सोनू-वीरू, वीरेंद्र व जितेंद्र यादव, अज्जू शर्मा, धर्मवीर खटीक, मोनू चौहान, सोनू तोमर, शेरा, धर्मेंद्र कुशवाह प्रमुख हैं।
अंचल के एनकाउंटर एक्सपर्टः रिटायर्ड डीआईजी हरि सिंह, प्रतिमा मैथ्यू, सीएसपी अशोक सिंह भदौरिया, केडी सोनकिया, सीएसपी अरविंद खरे, रामलखन सिंह भदौरिया, रामलखन सिंह, धनेंद्र सिंह, टीआई नवाब सिंह, किशन सिंह राठौर, गोविंद राम कुकरेजा सहित कई चर्चित नाम हैं।
अपराधी से कोई जातीय रंजिश नहीं थी, निलंबित रहे, जांचों का सामना किया, जुनून था-
रेंज में 106 लोगों के एनकाउंटर करने वाले रिटायर्ड डीएसपी अशोक भदौरिया का कहना है कि पुलिस की अपराधी से कोई जातीय रंजिश नहीं होती है। अपराधी की क्रूरता और परिस्थितियों में फंसकर ही मुठभेड़ होती है। किसी की जान जाने पर सवाल उठना स्वभाविक है और उठना भी चाहिए। हर एनकाउंटर के बाद जांच का सामना करना पड़ता है। सवालों के जवाब देने पड़ते हैं। नौकरी व जेल जाने की नौबत होती है। उन्होंने बताया कि अपने सर्विसकाल में उन्होंने कूल्हे में गोली खाई। बैसाखियों के सहारे चला। दो बार हत्या के मामले दर्ज हुए। विभागीय जांच के साथ कोर्ट की कार्रवाई का भी सामान किया, लेकिन अपराध का अंत करने का जुनून था।
संदेह करने वाली परिस्थितियों से बचना चाहिए, प्रदेश पुलिस से बड़ी चूक हुई है अपने सर्विसकाल में 25 एनकाउंटरों में 46 डकैतों को मारने वाले रिटायर्ड डीएसपी केडी सोनकिया का कहना है कि एनकाउंटर के मामले में मध्यप्रदेश पुलिस का रिकॉर्ड साफ-सुथरा रहा है। आमने-सामने के एनकाउंटरों में कयासों के अधार पर उंगलियां उठती हैं। क्योंकि अपराधी मारा जा चुका होता है, पुलिस ही साक्षी होती है। इसलिए लोग सवाल करते हैं। इनामी जगजीवन परिहार के साथ आमने-सामने हुए एनकाउंटर में दो गोली मुझे भी लगीं, एक एसआई शहीद हुए। सबके सामने एनकाउंटर हुआ। सोनकिया का मानना है कि विकास दुबे का एनकाउंटर जिन परिस्थितियों में हुआ उस पर सवाल उठना स्वभाविक है। विकास दुबे ने अक्षम्य गुनाह किया था। प्रदेश की पुलिस से भी चूक हुई है। किसी भी अपराधी को पकड़ने के बाद उसे कोर्ट में पेश करने की प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। ऐसा नहीं किया गया। संविधान ने न्याय करने का अधिकार पुलिस को नहीं दिया है। कई बार परिस्थितियों को देखकर तत्काल एक्शन लेना पड़ता है। यूपी पुलिस को विकास दुबे के एनकाउंटर पर उठ रहे सवालों का जवाब देना चाहिए।
मुठभेड़ पर सवाल उठना लाजिमी, राजनीति नहीं होनी चाहिए, अपराधी की क्रूरता और परिस्थतियां भी देखना चाहिए
loading...
Warning: Undefined array key "tie_hide_share" in /home/sites/43a/e/ed29062570/public_html/wp-content/themes/jarida/single.php on line 65
Warning: Trying to access array offset on value of type null in /home/sites/43a/e/ed29062570/public_html/wp-content/themes/jarida/single.php on line 65
बढ़ता कारवाँ | समाजवाद की ओर बढ़ते कदम… India's #1 Leading News Portal