जबलपुर -झोला छाप डॉक्टरों द्वारा कोरोना काल में एलोपैथिक पद्धति से मरीजों का इलाज किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एके मित्तल व जस्टिस व्हीके शुक्ला की युगलपीठ को सरकार की ओर से बताया गया कि 15 नीम-हकीम डॉक्टरों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। बताया गया कि जिसमें से कुछ की अग्रिम जमानत याचिका टायर कोर्ट ने खारिज कर दी है तथा कुछ लंबित हैं। लंबित जमानत आवेदन को सुनवाई के लिए उक्त याचिका में साथ युगलपीठ के समक्ष प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए हैं। याचिका की सुनवाई के दौरान इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से अनावेदक बनाये जाने के लिए आवेदन पेश किया गया। युगलपीठ ने आवेदन पर नोटिस जारी कर याचिका पर 13 जुलाई को अगली सुनवाई निर्धारित की है।
पंजीयन भी नहीं
शिकायत के बाद सिर्फ 13 झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्यवाही करते हुए पांच के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी गई थी। जिसमें से एक भी झोलाछाप डॉक्टरों की गिरफ्तारी नहीं हुई है और सभी मरीजों का गलत उपचार कर रहे हैं। उनके पास संबंधित चिकित्सा परिषद तथा सीएचएमओ कार्यालय का पंजीयन तक नहीं है।
28 की थी शिकायत
गौरतलब है कि यह मामला पत्रकार ऋषिकेष सराफ की ओर से दायर किया गया है। जिसमें कहा गया है कि झोला छाप डॉक्टर कोरोना काल में भी एलोपैथिक दवाईओं से सर्दी, जुखाम, बुखार आदि बीमारियों का उपचार कर रहे हैं। जिसके कारण कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। एलोपैथिक तरीके से उपचार करने वाले 28 छोलाछाप डॉक्टरों की शिकायत उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से की थी।
युगलपीठ को ये बताया
पिछली सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया था कि एक नीम हकीम डॉक्टर को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत का लाभ मिल गया है। जिसे गंभीरता से लेते हुए युगलपीठ ने निर्देश जारी कर कहा था कि जिन झोला झाप डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी है, उनकी जमानत आवेदन याचिका के साथ युगलपीठ के समक्ष पेश किये जाये। याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान उपमहाधिवक्ता स्वाप्निल गांगुली ने उक्त जानकारी पेश की। जिसके बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किये। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता परितोष गुप्ता ने पैरवी की
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