ग्वालियर-
काेरोना संक्रमण से मरने वाले डबरा के गंगाराम रोहिरा और गुप्ता परिवार में यह संक्रमण इंदौर से आए परिजन के कारण ही पहुंचा था। मुंबई (महाराष्ट्र) से आए 32 तथा अहमदाबाद से आए 22 लोग यहां कोरोना पाजिटिव निकले।
इंदौर व मुंबई से आए कोरोना मरीजों से डबरा में लोग संक्रमित हुए।
इंदौर से आए परिजन के कारण अकेले डबरा शहर में ही कोरोना संक्रमण के 30 मामले सामने आए, जिसमें से 2 मरीजों की तो मौत हो गई।
ग्वालियर में 10 लोग इंदौर से आए मरीजों से ही संक्रमित हुए। ग्वालियर और भिंड में ही देखा जाए तो इनमें सबसे अधिक 40 मरीज इंदौर से आए वायरस के कारण संक्रमित हुए।
इंदौर से आया वायरस ज्यादा ताकतवर
ग्वालियर में गजराराजा मेडिकल कॉलेज की वायरोलॉजिकल लैब में पिछले 54 दिनों में 17200 सैंपल की जांच की जा चुकी है। लैब के नोडल अधिकारी डॉ. वैभव मिश्रा, को-नोडल अधिकारी डॉ. ऋषिका खेतान के मुताबिक ग्वालियर-चंबल संभाग में जो वायरस इंदौर और मुंबई के रास्ते आया है उसमें सबसे ज्यादा संक्रमित करने वाला वायरस इंदौर से आया था। इसके बाद मुंबई और तीसरे नंबर पर अहमदाबाद से आए वायरस ने भी लोगों को अधिक प्रभावित किया है। उक्त शहरों से आया वायरस प्राइमरी स्टेज पर ताकतबर रहा होगा। जीआरएमसी के डीन डॉ. एसएन अयंगर का कहना है कि वायरोलॉजिकल लैब में दिन रात विशेषज्ञ जांच में लगे हुए हैं। यही कारण है कि वायरोलॉजीकल लैब में 7 अप्रैल से अबतक करीब 17200 सैंपलों की जांच की है।
डॉक्टर व अफसर, कोरोना की रोकथाम के लिए वैक्सीन न बनने तक कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने व चेन तोड़ने की कोशिश में दिनरात जुटे हुए हैं। इस खतरनाक वायरस के लगातार बदलते स्वाभाव को लेकर कोरोना सैंपल का परीक्षण व अध्ययन कर रहे वैज्ञानिकों व डॉक्टरों से चर्चा की और वायरस में बदलाव के कारण को समझा। रक्षा विभाग के अधीन आने वाले रक्षा अनुसंधान एवं विकास स्थापना (डीआरडीई) के वैज्ञानिकों के अनुसार देश में कोरोना वायरस उन शहरों में सबसे पहले आया, जहां अंतरराष्ट्रीय उड़ानें आती हैं। इसलिए यह वायरस इन शहरों में ही सबसे अधिक प्रभावी रहा। अब इसकी ताकत धीरे-धीरे कम होती जा रही है।
ग्वालियर-चंबल अंचल की बात करें तो यहां सऊदी अरब से सीधे मुरैना आए कोरोना संक्रमित से सबसे अधिक 14 लोग संक्रमित हुए। इसके बाद इंदौर व मुंबई से आए कोरोना मरीजों से डबरा में लोग संक्रमित हुए। दिल्ली व अहमदाबाद से आए लोगों में वायरस अपेक्षाकृत कमजोर रहा, लेकिन हाल ही में दिल्ली से आए दिनेश राठौर द्वारा बताई गई हिस्ट्री को लेकर विशेषज्ञ भी असमंजस में है। विशेषज्ञों के अनुसार दिनेश या तो हिस्ट्री में कुछ छिपा रहा या उसे संक्रमण होने का एहसास नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार दिनेश दिल्ली में किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आकर संक्रमित हुआ जो विदेश से आया हो या किसी अस्पताल में विदेशी से आए व्यक्ति से मिलकर आया हो, दिनेश से संक्रमित होने वालों की संख्या 49 तक पहुंची है।
विशेषज्ञ के अनुसार.. बिना लक्षण वाले मरीजों से खतरा ज्यादा
ग्वालियर में अहमदाबाद या दिल्ली के रास्ते जो भी संक्रमित आए वह मजदूर वर्ग से हैं। यह वायरस कई लोगों को उनसे पहले संक्रमित कर चुका था इसलिए वह कमजोर हो गया था। यहां के लोगों में इम्युनिटी अच्छी होने के कारण वायरस का संक्रमण होने के बाद भी अधिकांश रोगियों में लक्षण नहीं उभरे, लेकिन बिना लक्षण वाला व्यक्ति कमजोर इम्युनिटी वाले व्यक्ति के संपर्क में आता है तो उसमें लक्षण उभरते हैं। लक्षण वाले मरीज को क्वारेंटाइन व अस्पताल भेजने से चेन टूट जाती है जबकि बिना लक्षण वाले से चेन आगे बढ़ती है। जिन मरीजों में वायरस के लक्षण उभर आते हैं उसे क्वारेंटाइन कर व अस्पताल में भर्ती करने से संक्रमण की चेन टूट जाती है, जबकि अच्छी इम्युनिटी वाले संक्रमित को खुद के संक्रमण का आभास न होने से उससे संक्रमण की चेन आगे बढ़ती रहती है।
-डॉ. रामकुमार धाकड़, वरिष्ठ वैज्ञानिक, डीआरडीई
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