ग्वालियर. कोरोना पॉजिटिव मरीजों की जिले में संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने कोविड-19 की ड्यूटी में लगे डाॅक्टर और पैैरामेडिकल स्टाफ को इससे मुक्त करना शुुरू कर दिया है। मोतीमहल में बने आपदा नियंत्रण कक्ष और क्वारेंटाइन सेंटरों पर ड्यूटी कर रहे 48 डाॅक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ काे हटाकर 1 जून से उनके मूल पदस्थापना स्थल पर काम के आदेश दिए गए हैं। उधर, जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसके वर्मा ने पद छोड़ने की इच्छा जाहिर करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखा है। कहा जा रहा है कि राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारियों की दखलंदाजी बढ़ने से परेशान होने के कारण उन्होंने पद छोड़ने की बात कही है।
उनके अधीनस्थों ने नाम न छापने के अनुरोध पर बताया कि सीएमएचओ पर फार्मासिस्ट से लेकर डॉक्टरों को मनमाफिक स्थानों पर पदस्थ करने का दबाव बनाया जा रहा है। इससे तंग आकर डॉ. वर्मा ने पद छोड़ने का मन बनाया है। हालांकि डॉ. एसके वर्मा ने दैनिक भास्कर से कहा कि उन्होंने पारिवारिक और व्यक्तिगत कारणों से पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की है। डॉ. वर्मा की पदस्थापना इसी साल एक फरवरी काे कमलनाथ सरकार में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने की थी।
डाॅक्टराें काे संजीवनी क्लीनिक पर भेजा
आपदा नियंत्रण कक्ष में तैनात संविदा चिकित्सा अधिकारी डाॅ. सौनम जैन, डाॅ. आंकाक्षा राजौरिया और डाॅ.गजेंद्र धाकड़ को क्रमश: पीएचई, अवाड़पुरा और रेशम मिल की संजीवनी क्लीनिक पर भेजा गया है। डाॅ. धाकड़ को संजीवनी क्लीनिक के साथ होटल चंद्रलोक और होटल एंबियंस के लिए फोन पर उपलब्ध रहने को कहा गया है।
चिकित्सा अधिकारी डॉ. रेणूका श्रीवास्तव को सत्कार गेस्ट हाउस एवं विधिचंद्र धर्मशाला से हटाया गया है।
डाॅ. सौरभ शर्मा, डाॅ. हृदेश त्रिवेदी और डाॅ. वैभव कुशवाह को जिला अस्पताल से हटाकर संजीवनी क्लीनिक पर भेजा गया है।
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