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संकरी सड़क हाेने से पहली मंजिल पर नहीं फेंका जा सका पानी, फायर सूट न हाेने से धुएं में घुस नहीं पाए / संकरी सड़क हाेने से पहली मंजिल पर नहीं फेंका जा सका पानी, फायर सूट न हाेने से धुएं में घुस नहीं पाएअग्निकांड / संकरी सड़क हाेने से पहली मंजिल पर नहीं फेंका जा सका पानी, फायर सूट न हाेने से धुएं में घुस नहीं पाए

ग्वालियर- तीन मंजिला इमारत रोशनीघर रोड पर में आग लगने से सात लगें की मौत के हादसे ने संकरे इलाकों और केमिकल से लगी आग काने बुझाने के लिए सरकारी इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निगम का दावा है कि हादसे की सूचना मिलने के बाद महज 10 मिनट में फायर अमला मौके पर पहुंचा और आग बुझाने का काम शुरू किया गया, लेकिन फिर भी मकान में फंसे आठ लोगांे में से एक बच्ची गौरवी को ही बचाया जा सका। तीन बच्चों और चार महिलाओं की दम घुटने से जान चली गई। इनमें से दो बच्चे तो लगभग जिंदा ही जल गए। हादसे के मूल में दो तरह की लापरवाही रही।
तीन मंजिला इमारत के बेसमेंट में रंग बनाने के 3 मिक्सर प्लांट व हजारों लीटर थिनर रखा था
शॉर्ट सर्किट से चिंगारी उठी और केमिकल में हुआ विस्फोट, धुआं व आग की लपटों से उजड़ा परिवार
पहली… मकान बारूद के ढेर पर बना था। यानि इमारत के ग्राउंड फ्लाेर पर संचालित पेंट की दुकान और उसके नीचे बेसमेंट में हजारों लीटर थिनर कंटेनर का स्टाॅक था। दुकान में भी केमिकल और थिनर के बॉक्स रखे थे। वहां रंग बनाने के तीन मिक्सर प्लांट लगे हुए थे। शॉर्ट सर्किट के बाद चिंगारी उठी और तार जलकर कार्टन पर गिरा ताेे विस्फाेट हो गया और आग पूरे मकान में फैल गई। थिनर और पेंट की वजह से धुआं उठा, जो पूरे मकान में तेजी से फैला, जिससे अंदर मौजूद लोगों का दम घुट गया। चंद मिनटों में ही पूरा परिवार उजड़ गया। संकरी सड़क पर बनी इस इमारत में हवा पहुंचने के लिए जरूरी राेशनदान भी कम थे। बाहर निकलने के लिए सीढ़ी के नीचे से एक छोटा रास्ता था, इसमें धुंआ भर गया तो ऊपर फंसे लोग नीचे आने की हिम्मत तक नहीं कर सके।
दूसरी… इमारत में केमिकल का स्टाॅक था, लेकिन दमकल अमले ने आग बुझाने के लिए पानी का इस्तेमाल किया, जबकि केमिकल से लगी आग पर फाेम का अधिक उपयाेग कर जल्दी काबू पाया जा सकता था। इसके अलावा आग बुझने के बाद भी धुअां फैला हुअा था। इस धुएं के बीच इमारत में अंदर जाने के लिए फायर अमले पर फायर सूट, अाॅक्सीजन मास्क इत्यादि नहीं थे। यदि ये संसाधन हाेते ताने और जल्दी दमकल कर्मचारी अंदर दाखिल हाे सकते थे। मकान में एंट्री के लिए पास के एक प्लॉट पर लगा गेट तोड़ा और दाईं तरफ से थ्रीडी मशीन के जरिए दीवार तोड़ी, लेकिन तब तक सात जिंदगियां जल चुकी थीं। इस मशीन से सिर्फ शव बाहर निकाले गए।
सास और बहुओं की एकसाथ अंत्येष्टि… दाल बाजार और लोहिया बाजार रहे बंद
अग्निकांड में गोयल परिवार के तीन बच्चों एवं चार महिलाओं की मौत हुई। घर से एकसाथ से सात अर्थियां उठीं। बच्चों को दफनाया गया और सास और बहुओं की अंत्येष्टि एकसाथ की गई। यहां पहुंचा हर शख्स की आंख नम थी। आसपास के लोग भी आंसू नहीं रोक पा रहे थे। बार-बार घर की तरफ देखकर लोगों के आंसू निकल रहे थे। जिस घर में चार-चार बच्चों की चहलकदमी थी, वहां मातम पसरा था। शोक में दाल बाजार और लोहिया बाजार के व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं। दाल बाजार मंगलवार को भी बंद रहेगा।
दो वजहें: इसलिए नहीं बचाई जा सकीं जिंदगियां
1. हादसे के बाद बिजली काटने से इमारत में हाे गया अंधेरा, धुएं के बीच फंसी रह गईं सात जिंदगियां
मकान में तेजी से आग फैली। नीचे उतरने के रास्ते पर धुंआ भर गया था। आग लगने के बाद बिजली काट दी गई, जिससे अंदर अंधेरा छा गया। अंधेरा होने के अलावा पूरे घर में धुंआ भर गया और कुछ ही मिनटों में आग पूरे घर में फैल गई। जिसकी तपन की वजह से जो जहां फंसा था, वहां से निकल नहीं पाया।
2. संकरी रोड और बिजली के ताराें के कारण पांच करोड़ रुपए खर्च कर खरीदा हाईड्रोलिक प्लेटफार्म खुला ही नहीं
फायर ब्रिगेड अमला पांच करोड़ का हाईड्रोलिक प्लेटफार्म लेकर यहां पहुंचा, लेकिन ऊपर बिजली के तार और सड़क संकरी होने की वजह से यह खुल ही नहीं पाया। इसलिए ऊपर की मंजिलों पर तेजी से पानी नहीं जा पाया। सीढ़ी का इस्तेमाल किया गया, लेकिन तब तक आग भड़क चुकी थी। परिजन का कहना था कि फायर ब्रिगेड देर से पहुंची।
अफसोस: हम बच्चों को बचा नहीं पाए
जब बच्चों के शव बाहर आए तो मकान की पहली मंजिल पर रेस्क्यू टीम के साथ लगे पुलिस अफसरों की आंखें भी नम हो गई। टीआई विनय शर्मा, पंकज त्यागी और विवेक अष्ठाना सबसे पहले पहुंचे। फायर ब्रिगेड के नोडल ऑफिसर केशव चौहान के साथ आग बुझाने में मदद की, लेकिन जब बच्चों के शव निकले तो इनके मुंह से निकला, अफसोस है हम बच्चों को नहीं बचा पाए।

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