ग्वालियर-
लॉकडाउन के बीच अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई की चिंता सता रही है। स्कूल बंद हैं, इसके बावजूद अप्रैल से जून तक की फीस भरने के लिए संदेश पहुंचने लगे हैं। कुछ स्कूलों ने स्कूल बंद होने के बावजूद ऑनलाइन पढ़ाने का हवाला देकर फीस की मांग रखी है जबकि ज्यादातर अभिभावक लॉकडाउन में आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, ऐसे में स्कूलों की मनमानी के आगे बेबस हैं। इधर, प्रदेश सरकार भी स्कूलों के लिए कोई नीति तय नहीं कर रही है। जिस वजह से उनके हौसले बुलंद हैं। वहीं देश के कई राज्यों में मौजूदा हालात को देखते हुए स्कूल फीस पर रोक लग चुकी है।
आधा दर्जन राज्यों में मिली राहत
मप्र पालक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल विश्वकर्मा ने बताया कि देश में गुजरात, ओडिशा, झारखंड, दिल्ली, उत्तराखंड में अभिभावकों को राहत भरे आदेश जारी हो चुके हैं। इन राज्यों ने स्कूल फीस लेने पर रोक लगा दी है।
कुछ ने स्कूल बंद होने तक फीस की मांग भी नहीं करने के साफ निर्देश जारी किए हैं। जबकि मप्र में दो करोड़ अभिभावकों को अभी तक फीस से राहत नहीं मिली है। कमल विश्वकर्मा के अनुसार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अभी तक इस दिशा में कोई राहत भरा कदम नहीं उठाया है जबकि कोरोना महामारी की वजह से लगभग दो माह से रोज कमाने-खाने वाले लोगों के पास आर्थिक तंगी है इसके बावजूद कोई राहत नहीं दी जा रही है।
सोशल मीडिया से भेज रहे पत्र
प्रदेश के अभिभावकों की तरफ से लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से राज्यपाल, मुख्यमंत्री और सीबीएसई बोर्ड तक चिट्ठी लिखकर फीस माफी की मांग की जा रही है। सवाल -क्यों चुप सरकार -जब स्कूलों में लॉकडाउन लागू है तो फिर फीस क्यों मांगी जा रही है। -अप्रैल से जून माह की फीस स्कूल क्यों नहीं माफ कर रहे हैं जबकि कई स्कूल संचालन में सरकार से मदद लेते हैं। -मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्कूल फीस माफी को लेकर राज्य को निर्णय लेने स्वत्रंत किया है – जब अन्य राज्यों ने अपने प्रदेश की जनता का हित देखते निर्णय लिया तो प्रदेश में क्यों देरी।
इनका कहना है
फीस माफी को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग से चर्चा की गई थी लेकिन अभी तक कोई निर्देश नहीं मिला है। शासन स्तर पर निर्णय लिया जाना है।
सुनील कुमार नेमा, डीईओ
अन्य राज्यों में जब अभिभावकों को फीस माफी की राहत दी जा रही है तो ऐसे वक्त में मप्र सरकार क्यों विलंब कर रही है, ये समझ से परे है। स्कूल बंद हैं इसलिए फीस माफ होनी चाहिए। ऐसा नहीं हुआ तो इस संबंध में याचिका दाखिल होगी।
पीजी नाजपांडे, संयोजक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच
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