जीवाजी यूनिवर्सिटी-आनंद मिश्रा 17 माह बाद फिर रजिस्ट्रार बने
ग्वालियर-जेयू के रजिस्ट्रार पद पर 17 महीने बाद प्रो. आनंद मिश्रा की वापसी हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने उनकी प्रतिनियुक्ति के आदेश जारी करने के साथ ही 25 दिन पहले रजिस्ट्रार बनाए गए प्रो. एपीएस चौहान को हटाने के आदेश भी जारी किए। प्रो. मिश्रा ने शाम को कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के निवास पर पहुंचकर अपना कार्यभार भी ग्रहण कर लिया। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार के पतन और भाजपा की सरकार बनने के साथ ही इस तरह के बदलाव के कयास लगाए जा रहे थे। दरअसल प्रो. मिश्रा ने अपनी वापसी को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था।
प्रदेश में राजनीतिक उठापटक के चलते 2018 के विधानसभा के चुनाव के दौरान कांग्रेसियों ने उनकी शिकायत की थी कि वे दतिया विधानसभा क्षेत्र के चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं। यहां से उनके भाई भाजपा के नेता और मंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा चुनाव लड़ रहे थे।
शिकायत के बाद प्रो. मिश्रा को चुनाव आयोग के निर्देश पर इंदौर स्थानांतरित किया गया। इसके बाद चुनाव के नतीजे आये और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी। कांग्रेस सरकार ने प्रो. मिश्रा को इंदौर से हटाकर पहले अशोकनगर की तहसील सरनागत मेंऔर उसके बाद तेंदूखेड़ा भेज दिया। इस बीच अपने ही नेताओं की पसंद, नापसंद के चलते कांग्रेस सरकार कई महीनों तक जीवाजी यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रार के पद पर कोई नियुक्ति नहीं कर पाई। प्रो. मिश्रा पहली बार 2005 में रजिस्ट्रार बने थे लेकिन 2006 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद भाजपा सरकार में उनके भाई नरोत्तम मिश्रा का कद बढ ड़ा तो 28 अप्रैल 2010 को वे फिर रजिस्ट्रार बन गए। इसके बाद कार्यकाल पूरा होने पर उन्हें एक्सटेंशन भी मिला।
कांग्रेस सरकार ने जाते-जाते की प्रो. चौहान की नियुक्ति : कांग्रेस की राजनीति में अंदरूनी खींचतान के चलते 10 मार्च के बाद कमलनाथ सरकार के सामने संकट बढ़ता गया। इसके बाद ताबड़तोड़ नियुक्तियों का सिलसिला शुरू हुआ तो 16 मार्च को प्रो. एपीएस चौहान को जेयू का रजिस्ट्रार बनाए जाने का आदेश भी जारी कर दिया गया। उन्होंने भी बिना देरी किए 17 मार्च को कार्यभार संभाल लिया। इसके बाद प्रदेश में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से घूमा और मुख्यमंत्री कमलनाथ के इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस की सत्ता से विदाई हो गई। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में फिर भाजपा की सरकार बनी। नतीजा, प्रो. चौहान को 25 दिन बाद ही रजिस्ट्रार पद से हटाने के आदेश जारी हो गए।
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