ग्वालियर.
डबराशहर लॉक डाउन होने के बावजूद भी दो दिनों से शहर के लोग जरुरतमंदों को खाना बांटने से लेकर अन्य सामग्री पहुंचाने के लिए घरों से निकल रहे हैं, इससे सड़कों पर लोगों की भीड़ जुट रही है। शनिवार को सोशल मीडिया पर लगातार हो रही ऐसी ही वीडियो अपलोड के चलते प्रशासन हरकत में आया और एसडीएम जयति सिंह व तहसीलदार नवनीत शर्मा सड़कों पर उतरे और खाना बांटने वाले लोगों को समझाया कि वह खुद सामग्री न बांटे, बल्कि प्रशासन को दें, जिससे सोशल डिस्टेंस का उल्लंघन न हो और भोजन भी जरुरतमंदों तक पहुंचा जाए। वहीं लोगों को घरों से बाहर निकलने से रोकने के लिए बनाई गई किराने की सामान की होम डिलीवरी की योजना पहले ही दिन फेल हो गई। जारी किए गए नंबरों पर लोग सामान के लिए फोन लगाते रहे और दुकानदार स्टाफ नहीं होने के चलते असमर्थता जताते रहे।
दरअसल दूसरे राज्यों व जिलों से शहर से होकर विगत तीन दिनों से काफी संख्या में मजदूरों के झुंड निकल रहे हैं। पैदल आ रहे इन मजदूरों को खाने पीनेे की सामग्री देने के लिए शुक्रवार से शहर के समाजसेवियों सहित अन्य लोग मदद करने के लिए आगे आए। मजदूरों को इस तरह से खाना व अन्य सामग्री बांटने वाले सोशल मीडिया पर वायरल होने के चलते शनिवार को काफी संख्या में लोग मजदूरों को खाना व अन्य सामग्री बांटने के लिए उमड़ पड़े। जिसकी वजह से हाईवे व अन्य सड़कों पर भीड़ एकत्रित हो गई और सोशल डिस्टेंस का उल्लंघन हो रहा था। लगातार सोशल मीडिया पर आ रहे वीडियो के बाद एसडीएम व तहसीलदार हरकत में आए और लोगों को समझाया कि वह खुद इस तरह से सामान न बांटे, इसके लिए कंट्रोल रुम बनाया गया है, वहां पर जाकर सामान और जगह बताएं, उसे वहीं बंटवाया जाएगा, जिसके चलते लोगों ने स्वयं सामग्री बांटना बंद किया।
बीमारी से पीडि़त मरीजों की घर-घर जाकर ली जाएगी जानकारी
पिछोर कस्बे में रैपिड रेस्पॉंस टीम का गठन किया गया है। यह टीम प्रत्येक वार्ड में घर-घर जाकर संपर्क करेंगे एवं संक्रमित होने की आशंका अथवा कोई भी समस्या होने पर सहायक प्रभारी एवं प्रभारी को तत्काल सूचित करेंगे। जिसके लिए शनिवार को नगर परिषद सभाकक्ष में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, पटवारियों की नायब तहसीलदार आनंद गोस्वामी, नगर परिषद सीएमओ रामेश्वर दयाल यादव बैठक ली गई। का आयोजन किया गया जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका प्रत्येक वार्ड में घर-घर जाकर संक्रमित व्यक्तियों की जानकारी उपलब्ध करेंगे। जिसकी सूचना प्रभारी पटवारी को प्रतिदिन सौंपेंगे। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में में भी पंचायत सचिव आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका गांव में भी घर-घर व्यक्तियों की जानकारी उपलब्ध कराएंगे। ताकि कोरोना के खिलाफ जारी जंग को जीता जा सके। इस दौरान लोगों को जागरुक भी किया जाएगा कि बार-बार अपने हाथ अच्छी तरह साबुन से धोते रहें और घरों में ही रहें। घरों से बाहर न निकलें। लॉक डाउन को जारी नियमों का पालन करें और किसी भी तरह से घबराएं नहीं। जानकारी और सावधानी से इस कोरोना बीमारी को पूरी तरह हराया जा सकता है और स्वस्थ्य जीवन जी सकते हैं।
बाहर से आ रहे लोगों की नहीं हो रही जांच
कोरोना के डर के कारण अन्य शहरों में मजदूरी के लिए गए लोग अपने घरों को लौट रहे हैं। भूखे-प्यासे पैदल ही अपने घरों के लिए वे लोग चल दिए हैं। ऐसे ही कई लोग आ रहे हैं। लेकिन इस दौरान लापरवाही बरती जा रही है। शहर में दूसरे राज्यों व जिलों से आने वाले मजदूरों को छोड़ने व खाने पीने की व्यवस्था तो प्रशासन द्वारा की जा रही है। लेकिन इन लोगों की जांच के लिए किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं है। किसी भी मजदूर की जांच किए बगैर ही उन्हें बसों व अन्य वाहनों में भेजा जा रहा है। खास बात यह है के इस दौरान सोशल डिस्टेंस का भी ख्याल नहीं रखा जा रहा है। यह लापरवाही भारी पड़ सकती है, क्योंकि कोरोना वायरस की कड़ी तोड़ने के लिए लॉक डाउन के पूरे नियमों का पालन होना चाहिए।
होम डिलीवरी की योजना हुई फेल
लॉक डाउन के चलते लोग घर से नहीं निकलें इसके लिए प्रशासन द्वारा 14 किराना दुकानों की सूची बनाई गई थी। इसके लिए दुकानदारों से भी सहमति लेकर इनके मोबाइल नंबर भी जारी किए गए थे। लेकिन यह योजना पहले दिन ही फेल हो गई। सुबह से लेकर दिनभर लोग फोन लगाते रहे और दुकानदार स्टाफ न होने की बात कहकर सामान पहुंचाने में असमर्थता जताते रहे। इसके बाद शाम को किराना व्यवसायी संघ द्वारा होम डिलीवरी करने से मना कर दिया। संघ के अध्यक्ष प्रमोद भगत का कहना है कि होम डिलीवरी की सूची देते समय प्रशासन द्वारा कहा गया था कि सामान ले जाने वालों के लिए पहचान पत्र दिए जाएंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया। यह मुख्य वजह रही योजना फेल होने की।
निजी डॉक्टर नहीं खोल रहे क्लीनिक
कलेक्टर द्वारा शहर के सभी प्राइवेट क्लीनिकों को अनिवार्य रुप से खोले जाने के आदेश दिए गए थे। लेकिन कोरोना वायरस के डर से शहर के एक-दो क्लीनिकों को छोड़कर कोई भी डॉक्टर अपने क्लीनिक नहीं खोल रहे हैं। खास बात यह है कि डॉक्टरों ने अपने आप को होम आइसोलेट कर लिया है। कोई भी मरीज यदि डॉक्टर के क्लीनिक पर पहुंचता है तो न तो डॉक्टर बाहर निकलकर आते हैं और न ही क्लीनिक खोलते हैं। निराश होकर मरीजों को लौटना पड़ रहा है। वहीं जानकारी के बाद भी प्रशासन के अधिकारी क्लीनिकों को नहीं खुलवा रहे हैं। ऐसे में लोग परेशान हो रहे हैं, जबकि प्राइवेट डॉक्टरों को ऐसे समय में अपना कर्तव्य निभाते हुए जनसेवा के उद्देश्य से क्लीनिक खोलने चाहिए और लोगों का इलाज करना चाहिए।
पिछोर नगरपरिषद कार्यालय में कोरोना की रोकथाम के लिए नायब तहसीलदार द्वारा ली गई बैठक, लेकिन बैठक में सोशल डिस्टेंस का ध्यान नहीं रखा गया।
पिछोर में बेवजह बाहर निकलने वाले युवकों को पुलिस ने बनाया मुर्गा। साथ ही समझाया कि घर में रहोगे तो कोरोना से बचे रहोंगे, इसलिए केवल घर में रहो।
भितरवार तहसील के खेड़ा टांका गांव में खांसी, जुकाम अाैर बुखार से कुछ दिन से पीड़ित चल रही एक महिला ने शनिवार की सुबह साढ़े नौ बजे दम ताेड़ दिया। गांव में दाे-तीन से चर्चा चल रही थी कि बीमार यह महिला कोरोना संक्रमित हो सकती है। शनिवार को जब उसका निधन हुआ तो गांव का कोई भी व्यक्ति उसके घर नहीं गया और न ही कोई अंतिम संस्कार में गया। ग्रामीणों ने एसडीएम व तहसीलदार को कोरोना संक्रमित होने की शंका में सूचना दी थी कि लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम भी शाम तक गांव नहीं पहुंची। जब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई नहीं आया तो परिजन ने अकेले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया। करहिया थाना क्षेत्र के ग्राम खेड़ा टांका निवासी रोशनलाल की पत्नी मुन्नीबाई 48 होली के त्यौहार के बाद से ही खांसी जुकाम से पीड़ित चल रही थी। इसका इलाज भी भितरवार के अस्पताल में चल रहा था। लंबे समय से पीड़ित महिला को आराम न मिलने के बाद शनिवार की सुबह उसकी मौत हो गई। महिला के कोरोना से संक्रमित होने की शंका में गांव में दहशत फैल गई। कोई भी ग्रामीण मृतिका के घर के पास तक नहीं गया। मृतक महिला के दोनों बच्चे भी जुकाम-खांसी और बुखार से पीड़ित होने पर गांव के लोगों ने इसकी सूचना तहसीलदार को दी और जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों की सूचना पर तहसीलदार ने स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजने का आश्वसन दिया लेकिन उसके बाद कोई नहीं आया। केके सिंह गौर एसडीएम भितरवार ने मामले में बताया कि खेड़ा टांका गांव में महिला की मौत हुई है। परिजनों के मुताबिक वह पहले से ही बीमार चल रही थी। उसका अस्पताल में इलाज भी कराया लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। मृत महिला के बीमार परिजन की भी अस्पताल में जांच कराई गई है। सभी को सामान्य खांसी जुकाम है। कोरोना जैसे लक्षण नजर नहीं आए।
पूर्व मंत्री इमरती ने खाना और दवाओं के लिए रेडक्राॅस को दिया दो लाख रुपए का चेक
काेरोना वायरस के प्रभाव के कारण आमलोगों का जनजीवन प्रभावित हो गया है, कई लोगों के पास खाने-पीने तक का सामान नहीं बचा है। ऐसे में अब इस तरह के जरुरतमंद लोगों की मदद के लिए कई समाजसेवी लोग सामने आने लगे हैं। शनिवार को पूर्व मंत्री इमरती देवी सुमन ने व्यक्तिगत रूप से दो लाख रुपए की राशि का चैक रेडक्रास के लिए एसडीएम जयति सिंह को दिया।
साथ ही कई सामजिक लोग भी जरुरतमंद लोगों को खाने के पैकेट मुहैया करा रहे हैं, साथ ही ड्यूटी पर लगे पुलिसकर्मी एवं अन्य लोगों को चाय एवं पानी मुहैया करा रहे हैं। हालांकि इस तरह के लोगों के लिए प्रशासन ने स्वयं सेवा कार्य न कर नगर पालिका के हेल्प डेस्क के माध्यम से सेवा करने के लिए कहा है। इसके लिए नगर नोडल अधिकारी अनुज शिवहरे के नंबर 9074685675 पर फोन कर सामग्री और जरुरत मंद लोगों के बारे में जानकारी दी जा सकती है। जिसके चलते सेवा कार्य में लगे स्थानीय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने कच्ची सामग्री आटा दाल चावल समाज से आव्हान के द्वारा एकत्रित कर प्रशासन द्वारा नियुक्त नोडल ऑफिसर के माध्यम से वितरित कराने का प्रयास किए जाने का निर्णय लिया है। इसके लिए उनके द्वारा डबरा में 10 स्थानों पर कलेक्शन सेंटर बनाए गए, जो क्षेत्रफल की दृष्टि से समान दूरी पर स्थित है, उन 10 केंद्रों पर उस क्षेत्र में रहने वाले व्यक्ति उक्त दान दे सकते हैं, जिससे सामूहिक एकत्रित कर प्रशासन को सौंप दिया जा सकेगा
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