भोपाल- माफियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू होगी, बुंदेलखंड विशेष पैकेज के नाम पर दो हजार करोड़ से अधिक के हुए आर्थिक घोटाले की परतें फिर खुलेंगी। राज्य आर्थिक अपराध ब्यूरो ने मुख्य तकनीकी परीक्षक (सीटीई) से जांच रिपोर्ट तलब की है। सीटीई ने 12 हजार से अधिक पन्नों के दस्तावेज उपलब्ध भी करा दिए हैं। चार दिन के सियासी भूचाल के बाद सरकार एकबार फिर एक्शन में आ गई है। माफियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू होगी और आर्थिक अपराध में फंसे भाजपा शासनकाल के अफसरों और नेताओं पर गाज गिर सकती है। इस कड़ी में सरकार ने बुंदेलखंड विशेष पैकेज के नाम पर हुए भ्रष्टाचार की जांच फिर उखाड़ी है। हाल ही में मुख्यमंत्री कमल नाथ को अवगत कराया गया है कि विशेष पैकेज की राशि के उपयोग और योजना क्रियान्वयन के लिए बनाई गई मंत्रिपरिषद की समिति भी जिम्मेदार है जिसके रहते बड़ा भ्रष्टाचार हुआ।
11 अगस्त को बनी थी समिति
मंत्रि मंडल समिति 11 अगस्त 2014 में बनी थी। शासन ने कहा था कि भारत सरकार द्वारा बुंदेलखंड क्षेत्र में सूखे के प्रभाव को कम करने के लिए स्वीकृत विशेष पैकेज एवं समन्वित विकास के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए इस विभाग के पूर्व के आदेश 15 जनवरी 2010 को गठित मंत्रि परिषद समिति का निम्नानुसार पुनर्गठन किया जाता है। समिति में मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान को अध्यक्ष बनाया गया और सदस्य के तौर पर मंत्री रहे जयंत मलैया, गोपाल भार्गव, गौरीशंकर शेजवार, गौरीशंकर बिसेन, उमाशंकर गुप्ता और कुसुम सिंह महदेले को रखा गया था।
शिवराज ने दिए थे आदेश
इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सरकार ने 28 अगस्त 2013 में एक आदेश जारी कर जांच एजेंसियों को निर्देशित किया था कि भ्रष्टाचार के मामलों में जांच तो की जाए लेकिन राज्य सरकार के आदेश के बाद ही दोषियों पर कार्रवाई की जाए। पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया था कि बुंदेलखंड पैकेज की जांच के लिए मंत्रिमंडल की एक उप समिति गठित की गई है जोइस तरह के प्रकरणों की लगातार समीक्षा करेगी। चौहान की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी।
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