भोपाल- मप्र में 5 दिन से चल रहे सियासी ड्रामे के बीच दिन भर चुप्पी रही। हालांकि सबकुछ परदे के पीछे से चलता रहा। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह दिल्ली से भोपाल पहुंचे। वे सीएम हाउस पहुंचे और उनके साथ लंबी बैठक की। सीएम ने भी सभी विधायकों को राजधानी न छोड़ने की हिदायत दी है। सीएम हाउस में घंटों मंथन चला। यहां बसपा विधायक रामबाई भी पहुंचीं। यहां मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा की गई। नए विस्तार में बसपा विधायक रामबाई को मंत्री बनाया जा सकता है। साथ ही निगम-मंडलों में भी नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू होगी। उधर, रात करीब 9 बजे भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी ने फिर सनसनी फैला दी। एक टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा- मैं सरकार का समर्थन करता हूं और करता रहूंगा। सीएम से मिलने चोरी छिपके नहीं आता, आगे भी आता रहूंगा। उधर, सीएम ने सुरेंद्र सिंह शेरा और बिसाहूलाल से फोन पर बात की।
निर्दलीय मंत्री बनेंगे
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और मुख्यमंत्री कमल नाथ ने मिलकर जो रणनीति बनाई है, उसके तहत कांग्रेस के केपी सिंह, निर्दलीय राणा विक्रम सिंह, सुरेंद्र सिंह शेरा, सपा के राजेश शुक्ला तथा बसपा की रामबाई को मंत्री बना सकती है। यदि भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी कांग्रेस में शामिल होते है तो कांग्रेस के हरदीप सिंह डंग और नारायण त्रिपाठी के नाम पर मामला अटका है।
डंग का इस्तीफा नहीं स्टेटमेंट : दिग्विजय
कमल नाथ के नेतृत्व में सरकार पूरे पांच साल चलेगी। मंत्रिमंडल का विस्तार होना चाहिए, लेकिन विधानसभा के बजट सत्र के बाद। हरदीप सिंह डंग का इस्तीफा नहीं ‘स्टेटमेंट’ है।
भाजपा :10 कांग्रेसी विधायकों का इस्तीफा दिलाने की रणनीति
तेज होती मप्र की पॉलिटिक्स के बीच भाजपा भी हर ट्रिक्स आजमा रही है। उसने दिल्ली को सेंटर पॉइंट बनाया है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के घर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, नरोत्तम मिश्रा, गोपाल भार्गव और पूर्व संगठन मंत्री अरविंद मेनन, धर्मेंद्र प्रधान ने घंटों मंथन किया। मेनन को मप्र में तोड़फोड़ रोकने की जिम्मेदारी दी गई है, उधर बेंगलुरू में अरविंद भदौरिया मोर्चा संभाले हैं। चर्चा है भाजपा कर्नाटक फॉर्मूले पर काम करना चाहती है। उसने कांगे्रस के 10 विधायकों के इस्तीफे की रणनीति बनाई है। ऐसा होता है तो सदन में विधायकों की संख्या घटेगी और यह कांग्रेस की होगी। भाजपा इस मूड में है कि अपनी सरकार बनाने के लिए कुछ भी करने का मूड बना लिया है। पार्टी हर स्तर पर अपने विधायकों से बात कर उन्हें संगठित कर रही है।
दिल्ली की फटकार के बाद संजय पाठक के सुर बदले, कहा- भाजपा में हूं, यहीं रहूंगा
भाजपा विधायक संजय पाठक गुरुवार रात भोपाल पहुंचे थे। चर्चा थी कि वे सीएम हाउस पहुंचे और उनसे मुलाकात की। इसकी जानकारी दिल्ली पहुंची तो आलाकमान ने उनसे बात की। शुक्रवार सुबह फिर बैठक में नेताओ ने पाठक से फिर बात की। इसके बाद संजय ने शाम को बयान दिया कि वे भाजपा में थे और यहीं रहेंगे। उन्होंने कहा- कि मैं तो भोपाल में था ही नहीं। कांग्रेस मुझसे संपर्क में थी। मेरी राजनीतिक हत्या कराने की कोशिश हो रही है।
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