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21 करोड़ की जलावर्धन योजना के घटिया काम की पोल खुली, अब अमृत योजना में दोबारा बिछाए जाएंगे पाइप सवाल… पुरानी योजना के घटिया काम का जिम्मेदार कौन?

ग्वालियर- डबराजलावर्धन योजना के तहत इंटेकवेल से लेकर शहर में बनी पानी की टंकियों को भरने के लिए बिछाई गई पाइप लाइन घटिया है। इसमें कई तकनीकी खामियां भी हैं। इसलिए यह लाइन बार-बार फूट रही है। ऐसे में मरम्मत के लिए सड़कों को खोदना पड़ता है। साथ ही कई दिन तक पानी की सप्लाई बंद रहती है। इस समस्या से निपटने के लिए अब अमृत योजना के तहत नई पाइप लाइन बिछाई जाएगी। नई पाइप लाइन बिछने के बाद इसी से टंकियां भरी जाएंगी और पुरानी पाइप लाइन का उपयोग बंद कर दिया जाएगा।
21 करोड़ की जलावर्धन योजना के घटिया काम की पोल खुली, अब अमृत योजना में दोबारा बिछाए जाएंगे पाइप
जलावर्धन योजना की घटिया पाइप लाइन बार-बार फूट रही, इसलिए टंकियां भरने अब बिछाई जाएगी नई लाइनबड़ा सवाल… पुरानी योजना के घटिया काम का जिम्मेदार कौन? न ठेकेदार पर कार्रवाई न जिम्मेदार अफसरों पर

बता दें कि साल 2011 में जलावर्धन योजना के तहत शहर में पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ था। करीब 21 करोड़ लागत की इस योजना के काम में ठेकेदार ने शुरू से ही लापरवाही की। इसी योजना के तहत शहर के पुराना गाड़ी अड्डा और पशु अस्पताल परिसर में नई टंकियां बनवाई गई थीं। इन दो टंकियों के साथ ही गल्ला मंडी और कमल टॉकीज रोड पर बनी टंकियों को भरने के लिए सिंध नदी पर बनाए गए फिल्टर प्लांट से लेकर सभी टंकियों तक पाइप लाइन बिछाई गई थी। ठेकेदार ने घटिया पाइप लाइन बिछा दी। मानकों का पालन भी नहीं किया, इसलिए पाइप लाइन के काम में कई तकनीकी खामियां छोड़ दी गईं। जब योजना के तहत पानी की सप्लाई शुरू की गई तो पाइप लाइन लाइन फूटने की समस्या शुरू हो गई। अभी तक 50 से अधिक बार यह मेन लाइन फूट चुकी है। फूटी लाइन की मरम्मत के लिए सड़कों की खुदाई करना पड़ती है। इसी बीच कई दिन तक पानी की सप्लाई भी बंद रहती है। इस समस्या को दूर करने के लिए टंकियाें को भरने के लिए नई पाइप लाइन बिछाई जाएगी। यह नई पाइप लाइन अमृत योजना के तहत बिछाई जा रही है।
पहले जीआरपी लाइन बिछाई, डीआई लाइन बिछा रहे: जलावर्धन योजना के तहत जीआरपी (ग्लास रेनफोर्स्ड प्लास्टिक) पाइप लाइन बिछाई गई थी। यह पाइप लाइन प्रेशर के कारण बार-बार फूट रही है। अब अमृत मिशन में टंकियों को भरने के लिए डीआई (डक्ट आयरन) पाइप लाइन बिछाई जाएगी।
1.21 करोड़ लीटर का नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बना रहे
अमृत मिशन के अंतर्गत वानको कंपनी ने काम शुरू कर दिया है। कंपनी इंटेकवेल पर 12.1 एमएलडी (1.21 करोड़ लीटर) का नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बना रही है। इस ट्रीटमेंट प्लांट का बेस तैयार करने के लिए खुदाई कर दी गई है। यह प्लांट बनने के बाद जलावर्धन योजना के तहत बनाए गए 8 एमएलडी (80 लाख लीटर) के ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ दिया जाएगा, जिससे शहर को पानी उपलब्ध कराने के लिए कुल 20.1 एमएलडी (2.01 करोड़ लीटर) का प्लांट तैयार हो जाएगा। वानको कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रवीण कुमार के अनुसार यह आगामी 30 साल की जरूरत के अनुसार बनाया जा रहा है।
नई लाइन बिछने के बाद पुरानी लाइन बंद करेंगे
पानी की टंकियों को भरने के लिए नई डीआर लाइन बिछाई जाएगी। इसका काम शुरू कर दिया गया है। नई लाइन बिछाने के बाद पुरानी जीआरपी लाइन से टंकियां भरना बंद कर देंगे।  प्रवीन कर्रंदेकर, प्रोजेक्ट मैनेजर, वानकाे कंपनी
जलावर्धन योजना: तमाम खामियों के बाद भी करोड़ों का भुगतान कर दिया
जलावर्धन योजना की मेन पाइप लाइन में ही नहीं, शहर में सप्लाई के लिए डाली गई पाइप लाइन में भी खामियां है। वर्तमान कलेक्टर अनुराग चौधरी जब डबरा एसडीएम थे, तब उन्होंने खुद यह खामियां पकड़ी थीं, लेकिन इसके बाद भी नगर पालिका ने काम करने वाली कंपनी को करोड़ों का भुगतान कर दिया। अब तक न कंपनी के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई की गई न उन जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ, जिन्हें योजना के काम की मॉनीटरिंग करना थी। पाइप लाइन फूटने के बाद ठेकेदार ने मरम्मत भी नहीं कराई। यह काम भी नपा ने ही किया। ठेकेदार और अफसरों की मिलीभगत का खामियाजा अब जनता भुगत रही है।
अमृत मिशन: काम देरी से शुरू, हाईवे पर पाइप बिछाने की अनुमति भी नहीं
हाईवे पर पाइप लाइन बिछाई जा सके, इसके लिए वानको कंपनी और नगर पालिका ने स्वीकृति के लिए एनएचएआई को पत्र भेजा है, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। हालांकि नपा अधिकारियों का दावा है कि जल्द स्वीकृति मिल जाएगी। इसके अलावा योजना का काम देरी से शुरू होने के कारण शासन को पत्र भेजकर 8 महीने अवधि बढ़ाने के लिए कहा गया है। इस पर भी अभी स्वीकृति नहीं मिली है। यहां बता दें कि मार्च 2019 में कंपनी को वर्कऑर्डर मिला था और मार्च 2020 में कंपनी को काम खत्म करना था लेकिन अभी तक महज 5 फीसदी काम हो पाया है, इसलिए कंपनी ने समय बढ़ाने की मांग की है।
इंटकवैल पर ट्रीटमेंट प्लांट पर टंकी बनाने के लिए बेस तैयार करने की गई खुदाई।
शहर की सड़कों को खोदने की समस्या भी दूर होगी
21 करोड़ की जलावर्धन योजना के घटिया काम की पोल खुली, अब अमृत योजना में दोबारा बिछाए जाएंगे पाइप

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