ग्वालियर।
ऑटो और टेंपो में3 थानों की पुलिस, 3 किलोमीटर के सफर में बीते 6 महीने में 59 वारदातें चोरी की हुई है। ज्यादातर वारदातें स्टेशन से नदीगेट, जिंसीनाला के बीच रास्ते में हुई है। जब पीड़ित थाना पहुंचता है तो मामला दर्ज करने या आरोपित को पकड़ने के बजाय पुलिस फरियादी को ही सवालों के घेरे में लेकर परेशान करती है। सबसे पहले पुलिस की मंशा मामले को टालने या दूसरे थाने की सीमा में डालने की होती है। पर पुलिस यदि बदमाशों या जेब कतरों पर फंदा कसने की सोचे तो यह वारदातें कम हो सकती हैं। पर ऐसा नहीं किया जाता है।
6 महीने में 59 वारदातें
– बीते 6 महीनों में 1 अगस्त 2019 से अभी तक के बीच जिले की सीमा में सवारी वाहनों विशेषकर ऑटो, टेंपो व बसों में सवारी बनकर बैठने वाले चोरी की 59 वारदातें कर चुके हैं। इनमें संदेही पास बैठे व्यवसायी की जेब काटकर या फिर महिला या परिवार के बैग से गहने चोरी कर ले गए हैं। यह वह मामले हैं जो पुलिस तक पहुंचे हैं। पर कुछ घटनाएं ऐसी भी हैं, जिसमें पर्स में 500 या 1000 रुपए होने पर पुलिस के झंझट से बचने पीड़ित थाना गया तो पर सवाल-जवाब से परेशान होकर वापस शिकायत करने नहीं पहुंचा।
बाहर से आने वाले लोगों पर नजर
-सवारी वाहनों में जेब या बैग काटकर नगदी-गहने चोरी करने वालों की नजर सिर्फ स्टेशन व बस स्टैंड पर बाहर से आने वाले लोगों पर रहती है। इनकी नजर को पारखी कहें या फिर मुखबिरी। इन्हें पता रहता था कि किसके बैग में कैश या गहने हैं। उसी के पीछे यह ऑटो-टेंपो में सवार होते हैं और वारदात को अंजाम देकर तत्काल निकल जाते हैं।
ऐसे करते हैं वारदात
-स्टेशन या बस स्टैंड से टारगेट को सिलेक्ट करने के बाद गिरोह का एक सदस्य उसके पीछे चलता है। यदि टारगेट कोई परिवार है तो गिरोह के दो सदस्य सवारी वाहनों में घेरकर बैठते हैं। यह लोग उनके बैग पर अपना बैग रखकर फिर वारदात को अंजाम देते हैं। गिरोह का एक साथी बाइक लेकर साथ-साथ चलता है। जैसे ही वारदात को अंजाम दिया तो अपने फिक्स प्वाइंट पर उतरकर पीछे आ रहे साथी के साथ सवार होकर भाग जाते हैं। ऐसे में कोई इनको पकड़ भी ले तो ब्लेड मारकर घायल कर देते हैं।
3 थानों के बीच सबसे ज्यादा वारदातें
– चोरी की ज्यादातर वारदातें स्टेशन, बस स्टैंड से लेकर जिंसी नाला के बीच होती है। यह करीब 3 किलोमीटर का एरिया है। पर यहां 3 थानों की सीमाएं लगती है। जिसमें फूलबाग गुरुद्वारा तक पड़ाव, उसके बाद जिंसी नाला तक इंदरगंज और फिर कोतवाली थाने की सीमा है। इसी बीच में कुछ एरिया जनकगंज थाना का भी आता है। पुलिस को पता है कि क्षेत्र में कौन-कौन जेबकट हैं। ज्यादातर नशेड़ी इस तरह की वारदातें करते हैं। माल भी बिकने के लिए शहर के बाजारों में आता है। पर पुलिस पकड़ना चाहती ही नहीं है।
इन्होंने कहा
पुलिस टीमों को लगाया है। सवारी वाहनों में चोरी की घटनाओं का पता जब तक पुलिस को चलता है तब तक काफी देर हो चुकी होती है। नशेड़ियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। जल्द यह चोरी करने वाले भी पकड़े जाएंगे।
नवनीत भसीन
एसपी ग्वालियर
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