ग्वालियर- बचपन से ही माता-पिता को बच्चों में संस्कार डालने चाहिए। बच्चों में संस्कार होंगे तो एक अच्छे समाज का निर्माण होगा। लेकिन अाज के दौर में उल्टा हो रहा है। माता-पिता रोते हुए बच्चे को चुप कराने के लिए उसके हाथ में मोबाइल पकड़ा देते हैं। यह बहुत ही गंभीर स्थिति है। यह बात सुरेश नगर में चल रही भागवत कथा में कथा व्यास डॉ. कल्पना भार्गव ने कही।
उन्होंने कही कि आज के दौर में लगातार वृद्धाश्रम खुलते जा रहे हैं। देश में वृद्धाश्रम का होना ही सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। आज के दौर में अौलाद अपने जन्मदाता को खाना खिलाना दूर अपने पास तक नहीं रख रही है। इसका सबसे बड़ा कारण खुद माता-पिता ही हैं। उन्होंने बचपन में अपने बच्चे को संस्कार ही नहीं दिए। उन्होंने कहा कि आज कल दिल से संबंध बनाने वाले लोग बहुत ही कम देखने को मिलते हैं। दोस्त तो छोड़िए अाजकल के लोग माता-पिता तक से स्वार्थ के संबंध निभा रहे हैं। जमीन जायजाद के लिए भाई ही भाई का दुश्मन बन रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि छोटी-छोटी बातों पर भाई-भाई से लड़ने मरने पर उतारू हो रहा है। उन्होंने कहा कि माता पिता को बच्चों को महापुरुषों की कहानियां सुनानी चाहिए, जिससे वे संस्कारित बनें।
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