ग्वालियर-
जबलपुर में सीबीआई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान में लोकसेवकों के मध्य भ्रष्टाचार इस तरीके से पनप रहा है कि प्रत्येक लोक सेवक उसे अपना अधिकार समझने लगा है। देश में अब शायद ही ऐसा कोई कार्य शेष हो, जिसके संबंध में रिश्वत की मांग न की जाती हो या उसे प्राप्त न किया जाता हो। कुछ ही व्यक्ति ऐसे हैं, जिनसे लोक सेवक द्वारा मांग की गई रिश्वत के विरुद्ध वे हिम्मत करके शिकायत करते हैं। इस तरह का अपराध एक व्यक्ति के प्रति अपराध नहीं है, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के प्रति अपराध है, जिसके चलते संपूर्ण राष्ट्र का आर्थिक तानाबाना नष्ट हो रहा है। इस भ्रष्टाचार के चलते कुछ व्यक्ति गरीब होते जा रहे हैं और गरीबी व अमीरी की खाई भ्रष्टाचार के चलते समाज में बढ़ती जा रही है।
विशेष न्यायाधीश एसके चौबे की सीबीआई कोर्ट ने अपने सख्त फैसले में आगे कहा कि न्यायालय दोषसिद्घ आरोपित को दंड देते समय उसके प्रति नरम रुख अपनाया जाना न्यायोचित नहीं पाता है। इसलिए बचाव पक्ष की ओर से दी गई दलीलें नामंजूर करते हुए रिश्वत को अपना अधिकार समझने वाले आरपीएफ एसआई भोलानाथ सिंह यादव को 7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई जाती है। साथ ही 2 लाख 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया जाता है। जुर्माने की राशि अदा न किए जाने की सूरत में 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अपनी तरह का पहला सख्त फैसला
आमतौर पर इस तरह के मामलों में अब तक 4 साल तक का कारावास सुनाया जाता रहा है, इस दृष्टि से 7 वर्ष का कारावास अपनी तरह का पहला सख्त फैसला है, जिसके साथ 2 लाख 50 हजार का जुर्माना भी लगाया गया। आरोपित वर्तमान में जबलपुर का निवासी है लेकिन उसका स्थाई निवास चंदौली उप्र है।
10 लाख रुपए रिश्वत की मांग, 2 लाख लेते पकड़ा गया
अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक विवेक सिन्हा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि आरोपित आरपीएफ एसआई भोलानाथ सिंह यादव ने सतना में पदस्थ रहने के दौरान रेलवे सिग्नल केबल चोरी होने के मामले में पंजीबद्घ अपराध के सिलसिले में सिंधी कैम्प, सतना निवासी कबाड़ का व्यवसाय करने वाले नारायण दास आसवानी उर्फ नारु से 10 लाख रुपए रिश्वत की मांग की थी। यह राशि देने की स्थिति में अभियुक्त न बनाने का प्रलोभन दिया गया था। 24 अक्टूबर 2012 को यह सब हुआ। इसके अलावा भी एक अन्य मामले में आरोपित ने पद का दुरुपयोग किया। आसवानी ने रिश्वत मांगे जाने की शिकायत सीबीआई में कर दी। जिसके बाद 29 अक्टूबर 2012 को आरोपित को 2 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।
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