भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण उपकर में 475 करोड़ रुपए से अधिक की गड़बड़ी सामने आई है। यह खुलासा भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। गुरुवार को यह रिपोर्ट भोपाल विधानसभा पटल पर रखी गई है। सीएजी ने कर्मकार मंडल के पास रिकॉर्ड नहीं होने पर भी आपत्ति उठाई है और सरकार से व्यवस्थाएं सुधारने की सिफारिश की है।
सीएजी की रिपोर्ट में हुआ गड़बड़ी का खुलासा,
रिपोर्ट में सीएजी ने बताया है कि 31 मार्च 2018 में मप्र भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के पास 1212.79 करोड़ रुपए उपलब्ध थे। इसमें से 1063.78 करोड़ रुपए मंडल ने राष्ट्रीयकृत बैंकों की 29 शाखाओं में रख दिए। शेष 149.01 करोड़ रुपए का पता नहीं चल रहा है।
इतना ही नहीं, बैंक खातों में जमा राशि पर 326.94 करोड़ रुपए ब्याज मिला है। यह राशि भी रोकड़ पुस्तिका में दर्ज नहीं की गई है। इसके अलावा विभिन्न् विभागों द्वारा इकठ्ठी की गई उपकर की राशि का भी पता नहीं चल रहा है। सीएजी ने इस पर भी आपत्ति ली है कि मंडल के पास अचल संपत्ति पंजी ही नहीं है। इस कारण ऑडिट के समय मंडल की संपत्तियों का भौतिक सत्यापन नहीं किया जा सका।
श्रमिकों को नहीं मिला योजनाओं का लाभ
सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में इसका भी जिक्र किया है कि मंडल पंजीकृत श्रमिकों के लिए विभिन्न् योजनाएं संचालित करता है, लेकिन वर्ष 2017-18 में उपलब्ध निधि का सिर्फ 14 फीसदी ही उपयोग किया। जिसका लाभ पंजीकृत श्रमिकों में से महज 19 फीसदी को ही मिला।
रिपोर्ट में मंडल द्वारा श्रमिकों पर खर्च की गई राशि की तुलना पड़ोसी राज्यों से की है। इसके तहत छत्तीसगढ़ से 42 फीसदी कम, उत्तर प्रदेश से सात फीसदी अधिक राशि मप्र सरकार ने श्रमिकों पर खर्च की है। वहीं उत्तर प्रदेश से आठ फीसदी अधिक एवं छत्तीसगढ़ से 34 फीसदी कम श्रमिकों को लाभांवित किया गया है।
1656 चैक हो गए अनुपयोगी
रिपोर्ट में बताया गया है कि मंडल ने क्षेत्रीय कार्यालयों से वर्ष 2003-04 से 2017-18 के बीच 17.34 करोड़ रुपए के 1656 चैक प्राप्त किए। इन्हें बैंकों में जमा भी किया, लेकिन ये कालातीत (अनुपयोगी) हो गए। बैंक मानदंडों के अनुसार एक चैक जारी होने की तिथि से तीन माह के लिए वैध रहता है।
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