ग्वालियर-तानसेन समारोहमें तबला वादक का उपयोग अभी तक जुगलबंदी में होता था, कभी किसी वाद्य यंत्र के साथ तो कभी गायक के साथ बतौर संगत कलाकार। इस कारण धीरे-धीरे यह परंपरा खत्म हो रही थी। गुरु-शिष्य की इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए 10 पहले ताल सप्तक बनाया। इसके माध्यम से देश के प्रमुख घरानों की धुनों को सहेजने का काम कर रहे हैं। इन पंक्तियों के साथ भोपाल के सलीम अल्लाहवाले ने तानसेन संगीत समारोह के तीसरे दिन सुबह की संगीत सभा में प्रस्तुति की शुरुआत की। देश के प्रमुख घरानों की 200 साल पुरानी धुनों को प्रस्तुति दी गई।
ग्वालियर में चल रहे विश्व संगीत समागम तानसेन समारोहमें देश और विदेश के कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं।
समारोह में शाम की सभा में दो अलग-2 तहजीबों के सुर सजे। पंडित अजय पोहनकर और नित्यानंद हल्दीपुरकर ने जहां हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के मुख़्तलिफ रंग बिखेरे। वहीं ईरान से आये कलाकारों ने अपने मुल्क का संगीत की खुशबू से माहौल में एक अलग ही रंगत घोल दी। शाम की संगीत सभा में सर्द मौसम के बाद भी पं. अजय पोहनकर के प्रति लोगों की दीवानगी साफ दिखाई दी, इसलिए लोग परिवार सहित देर रात तक मौजूद रहे। उन्होंने लोगों की फरमाइश पर गज़ल की प्रस्तुति दी।
समारोह शुरुआत ध्रुपद गायन से हुई
तानसेन समारोह – प्रातः कालीन सभा में चीन से पधारे कलाकारों की प्रस्तुति। इसी सभा में बनारस से आए रामचंद्र भागवत ने वायलिन की प्रस्तुति से लोगों को मुग्ध कर दिया। चौथे दिन की सभा की शुरुआत ग्वालियर ध्रुपद केंद्र के विद्यार्थियों के ध्रुपद गायन से हुई। केंद्र के गुरु अभिजीत सुखदाने के निर्देशन में विद्यार्थियों ने राग भैरव और राग गुनकली में प्रस्तुति दी।
भोपाल के कलाकारों ने ताल सप्तक की प्रस्तुति दी
तानसेन संगीत समारोह में गुरुवार की संगीत सभा में जो दर्शक पहुंचे, उन्हें गायन और उम्दा वादन सुनने का अनुभव मिला। सुबह की सभा में ग्वालियर के जयवंत गायकवाड़ ने पखावज वादन पेश किया। इस सभा को चरम पर पहुंचाया भोपाल के सलीम अल्लाहवाले एवं उनके साथियों ने। समारोह में पहली बार भोपाल से आए 7 कलाकारों ने ताल सप्तक की प्रस्तुति दी। पहली बार एक ही ताल, लय पर कलाकारों ने तबला वादन किया।
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