ग्वालियर-
कैंसर के मरीजों को कोबाल्ट थैरेपी के लिए जेएएच में इंतजार नहीं करना पड़ेगा। कैंसर विभाग में 95 लाख रुपए की लागत से नया कोबाल्ट थैरेपी का सोर्स आ गया है। कोबाल्ट सोर्स को मशीन में फिट करने के साथ मशीन की सर्विस भी हो रही है। इसके बाद एआरबी से अनुमति लेकर कोबाल्ट थैरेपी की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। लिहाजा कैंसर मरीजों को अभी 25 दिसंबर तक कोबाल्ट थैरेपी की सुविधा नहीं मिल पाएगी। वर्तमान में पुराना सोर्स होने के कारण प्रतिदिन 35 से 40 मरीजों की कोबाल्ट थैरेपी हो पाती थी, लेकिन नया सोर्स आने के बाद अब प्रतिदिन 80 से 85 मरीजों को इसका लाभ मिलेगा। इससे विभाग को वेटिंग खत्म करने में भी मदद मिलेगी।
जेएएच के कैंसर विभाग में ग्वालियर-चंबल संभाग के साथ उप्र व राजस्थान के समीपवर्ती जिलों से कैंसर के मरीज इलाज कराने आते हैं।
जेएएच में 11 साल पहले जब कोबाल्ट थैरेपी की सुविधा शुरू हुई थी तब सोर्स आया था। यह सोर्स लगभग खत्म होने लगा था जिसके कारण मरीजों की थैरेपी करने में अधिक समय लगता था। इससे देखते हुए कैंसर के विभागाध्यक्ष डॉ. अक्षय निगम ने शासन से 95 लाख रुपए की मांग की। शासन से राशि स्वीकृत होते ही कोबाल्ट का सोर्स आ गया। इस कारण फिलहाल कोबाल्ट थैरेपी की सुविधा जेएएच में बंद कर दी गई है। डॉ. अक्षय निगम ने बताया कि एआरबी से अनुमति मिलते ही कोबाल्ट थैरेपी की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। नया कोबाल्ट सोर्स आ जाने से मरीजों की सिकाई जल्दी होगी और वेटिंग खत्म करने में भी हमें मदद मिलेगी।
क्या है कोबाल्ट थैरेपी: गामा किरणों से करते हैं उपचार
कोबाल्ट थैरेपी में कैंसर के मरीजों का गामा किरणों से उपचार करते हैं। डाॅ. अक्षय निगम के मुताबिक, जिस तरह एक्स-रे किया जाता है। उसी तरह इस थैरेपी में मरीज को जहां कैंसर होता है, उस स्थान पर किरणों को शूट किया जाता है। इस प्रक्रिया में पांच से दस मिनट लगते हैं।
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