ग्वालियर-
यंगस्टर्स के लिए इंस्पिरेशन का सोर्स
एक युवा के तौर पर जीवन अपनी शर्तों पर जीने के बाद अगले पड़ाव पर कदम रखते समय हर व्यक्ति के पास ऐसे सबक जरूर होते हैं जिनके बारे में उसे महसूस होता है कि यदि आज से करीब 20 वर्ष पहले उसे इन अनुभवों का ज्ञान होता तो शायद वह जीवन में कुछ गलतियां करने से बच सकता था या फिर खुशियों को ज्यादा अच्छे तरीके से एंजॉय कर सकता था।
हाल ही अपने 31वें जन्मदिन पर विराट कोहली ने 15 वर्षीय यंगर सेल्फ को एक इंस्पायरिंग लेटर लिखा जो हर उम्र के लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा।
यंगर सेल्फ को ऐसे ही लेटर्स इससे पहले भी कई सेलेब्रिटीज ने लिखे हैं जिनमें उन्होंने अपनी ही जर्नी से सीखे लाइफ लेसन्स शामिल किए हैं। ये लेसन्स पूरी दुनिया की यंग ब्रिगेड के लिए इंस्पायरिंग हैं।
ओपन रहो, सब कुछ आजमाओ… अपने पर्पज, पैशन और स्किल को साथ लाओ
प्रिय युवा एमी जो,
यह लेटर तुम्हें एशिया में समय बिताने के बाद यूएस वापस लौटते हुए प्लेन में लिख रही हूं। हम इस दुनिया को जितना देखते हैं, उतना ही हमें महसूस होता है कि हम कितना कम जानते या समझते हैं। तुम अपने सफर का निर्माण खुद करोगी जो तुम्हें अनूठा बनाता है। वैसे हम बहुत जिद्दी हैं और तुम शायद नीचे लिखी सलाहें नहीं मानोगी।
तुम कुछ शानदार चीजों का अनुभव करोगी। दुनिया हमसे कहीं अधिक बड़ी है और हमारे चारों ओर नहीं घूमती है। हमारे मेंटर्स समेत वे लोग जिनका हम सबसे अधिक सम्मान करते हैं, वे हमसे मिलने वाले सबसे विनम्र लोगों में शुमार हैं। खुद को इंस्पायर करो। हमें बहुत अच्छा लगता है जब अन्य लोग हमें इंस्पायर करते हैं, लेकिन इंस्पिरेशन की आत्मनिर्भर सप्लाई हमारे लिए एक सेफ्टी नेट का काम करती है।
थर्ड ग्रेड में तुम्हें एक स्पेशल रीडिंग एंड राइटिंग क्लास में रखा जाएगा क्योंकि तुम अपने क्लासमेट्स जैसा प्रदर्शन कर पाने में नाकाम रहोगी। स्वीकार करो, सुनो और सीखो। तुम इन स्किल्स को कई वर्षों बाद आजमाओगी जब तुम्हें अपनी पहली न्यू यॉर्क टाइम्स बेस्टसेलिंग बुक लिखने का मौका मिलेगा। तुम्हें हमेशा खुद को मिली ऑपर्च्युनिटी की कद्र करते हुए अपनी स्पीड को धीमा करना, सुनना और सीखना चाहिए।
पर्पज, पैशन और स्किल का मेल जहां होता है, वहीं आनंद मिलता है। यह वाक्य बकवास लग सकता है, लेकिन यही वह कारण है जिसकी वजह से तुम कॉलेज जाते समय अपना प्रोफेशन चुनने की चिंता नहीं करोगी – ओपन रहो, सब कुछ आजमाओ और अपनी फीलिंग को ध्यान लगाकर सुनो। पर्पज। पैशन। स्किल। इन्हें साथ लाओ।
शब्द महत्वपूर्ण हैं। सभी रिश्तों में जितना अधिक हो सके, “मैं” को “हम” से बदलो। अपने कॅरिअर की, वजन की, पैसे की, भविष्य की चिंता करना छोड़ो। सब कुछ सुलझ जाएगा। हम वॉरियर्स हैं, वरिअर्स नहीं। अच्छी बनो और मुस्कुराती रहो। अच्छाई और मुस्कुराहट बेहतरीन पॉजीटिव बूमरैंग्स हैं।
-एजो (लेखिका, स्पीकर व आंत्रप्रेन्योर)
एक सफल इंसान का निर्माण एक हजार विफलताओं के बाद ही होता है
प्रिय 13 वर्षीय रे,
ल जब तुम अपनी स्कूल बस से उतरोगे तो तुम एक बिलकुल नई दुनिया में होगे। जब भी तुम्हारे पिता किसी नए एयरफाेर्स बेस पर तैनात होते हैं तो तुम अपनी नई जिंदगी शुरू करते हो। नया स्कूल, नया कल्चर, नए चेहरे। नॉर्दर्न कैलिफोर्निया, फिर जर्मनी, फिर ओकलाहोमा, फिर इंग्लैंड, फिर सदर्न कैलिफोर्निया और अब साउथ कैरोलाइना।
तुम्हें ऐसा बच्चा होने की आदत है जिसे कोई नहीं जानता, जो एक आउटसाइडर है, लेकिन यह स्कूल ईयर के बीच का समय है। तुम एक नाजुक उम्र के हो और तुम्हारे आसपास मौजूद बच्चे मतलबी। तुम्हें लगता है कि बच्चों के किसी ग्रुप में तुम्हारी जगह नहीं है। काश, मैं तुम्हें बता सकता कि सब ठीक हो जाएगा, लेकिन तुम किसी के साथ फिट नहीं हो पाओगे। कई लाेग तुम्हारे दुश्मन केवल इसलिए होंगे क्योंकि तुम बाहर से आए हो। यह तुम्हारे लिए सबसे कठिन भी हाेगा और बेहतरीन भी।
मैं चाहता हूं कि तुम बास्केटबॉल कोर्ट जाओ। वहीं रहो। तुम अपने पूरे अस्तित्व का निर्माण वहां कर सकते हो। कई लोग तुम्हें सफल होते नहीं देखना चाहते। उनसे लड़ना मत। इससे कुछ हासिल नहीं होगा। इसकी बजाए याद रखना कि किसने तुमसे क्या कहा और इन बातों को हर दिन जागने के बाद उन्हें ऊर्जा के तौर पर इस्तेमाल करना।
तुम्हारे सामने 18 वर्षों का एनबीए कॅरिअर पड़ा है। मैं इसके बारे में तुम्हें कैसे बताऊं? तुम्हारे लिए क्या जानना जरूरी है? तुम माइकल जाॅर्डन और क्लाइड ड्रैक्सलर जैसे अपने हीरोज के खिलाफ खेलोगे। तुम डरोगे, लेकिन तुम हर दिन अपना काम करोगे। तुम अपने कॅरिअर में 26,000 से अधिक शॉट्स मारोगे और हर दस में से छह शॉट्स विफल भी होंगे, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं। एक सफल इंसान का निर्माण 1,000 विफलताओं से होता है। तुम्हारी बात की जाए तो 14,000 विफलताओं के बाद। तुम बोस्टन में एक चैंपियनशिप जीतोगे और मियामी में दूसरी, लेकिन मैं चाहता हूं कि तुम एक महत्वपूर्ण बात समझो। ट्रॉफी को सिर से ऊपर उठाकर तुम्हें खुशी तो मिलेगी, लेकिन असली खुशी तुम्हें मिलेगी हर सुबह उठकर मेहनत करने से। चैंपियनशिप्स तो केवल परिणति हैं। जिंदगी में सफर महत्वपूर्ण है, मंजिल नहीं। मैं यह तुम्हें उस 41 वर्षीय व्यक्ति के रूप में लिख रहा हूं जो रिटायर हो रहा है और जो खुद से पूरी तरह संतुुष्ट है।
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