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 कुलपति जीवाजी विश्वविद्यालय  पर आर्थिक अनियमितता का आरोप लगाया गया। इस मामले में कहा गया कि संभागायुक्त जांच करेंगे।

ग्वालियर- जीवाजी विश्वविद्यालय में हो रही अनिमितताओं को उच्च शिक्षा मंत्री ने संज्ञान में लिया है। उच्च शिक्षा मंत्री ने संभागायुक्त के माध्यम से कुलपति पर लगाए गए हर आरोप की तथ्यात्कम जांच रिपोर्ट तलब की है। शिकायत की जांच के लिए एक कमेटी भी बनाई गई है। इस कमेटी में अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा व साइंस कॉलेज के प्राचार्य को शामिल किया गया है। शिकायत में कुलपति पर आर्थिक अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। अगस्त 2019 में पूर्व कार्यपरिषद सदस्य अजीत भदौरिया व राजीव अग्रवाल ने उच्च शिक्षामंत्री को 400 पेज की शिकायत की थी। इस शिकायत में उन घोटालों व अनियमितताओं का खुलासा किया गया है, जिसकी वजह से जेयू की साख गिरी हैं और जेयू को नुकसान हुआ है। उच्च शिक्षा मंत्री पर शिकायत पहुंचने के बाद संभागायुक्त कार्यालय को पूरे मामले की जांच कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। संभागायुक्त ने अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा को जांच के लिए निर्देशित किया था। सात दिन में रिपोर्ट शासन तक पहुंचनी थी। लेकिन तीन महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट शासन के पास नहीं पहुंची। जांच में हुई देर को देखते हुए सख्ती बरती गई।

उपायुक्त (राजस्व) भूपेन्द्र गोयल ने 6 नवंबर को उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक को चेतावनी पत्र भेजा है कि जांच रिपोर्ट शीघ्र भेजी जाए। साथ ही कहा है कि स्पष्ट अभिमत के साथ रिपोर्ट भेजनी होगी। इस चेतावनी पत्र के बाद कमेटी के सदस्य जांच के लिए सक्रिय हो गए हैं।

कुलपति पर यह लगाए गए हैं आरोप

– रूसा की मद लैब तैयार की गई। इस लैब के लिए स्थानीय सप्लायरों से महंगे दामों पर उपकरण खरीदे गए हैं। मल्टीआर्ट के साउंड सिस्टम पर ज्यादा पैसा खर्च किया गया है।

– वर्ष 2008 में बीपीएड व एमपीएड की परीक्षा सेमेस्टर के माध्यम से कराए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। ऑर्डीनेंस के खिलाफ जाकर कुलपति ने परीक्षाएं करा दीं। फर्जी परीक्षा कराने में करोड़ों का भ्रष्टाचार किया गया है।

– सुरक्षा एजेंसी की लाइसेंस तिथि एक्सपायर हो गई थी। उसी को फिर से ठेका दिया गया। 131 कर्मचारियों की नियुक्ति मान्य थी, लेकिन भुगतान 218 का किया गया। सुरक्षा एजेंसी के नाम पर आर्थिक अनियमितता की गई।

– स्वीमिंग पुल के निर्माण का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री द्वारा किया गया था, लेकिन उसका स्थान बिना एक्सपर्ट की राय लिए बदल दिया। स्थान बदलने से 35 लाख रुपए का नुकसान जेयू को पहुंचाया गया।

– एक कमेटी बनाई जाए, जिससे सही जांच हो सके। धारा 52 लगाकर कुलपति को हटाया जा सके। नया कुलपति नियुक्त कर जेयू को बचाया जा सके।

मुख्यमंत्री को की थी शिकायत

– जीवाजी विश्वविद्यालय की साख खत्म हो चुकी है। विवि को बचाने के लिए मुख्यमंत्री के यहां शिकायत की थी। जेयू में सिर्फ घोटाले व अनियमितताओं के अलावा कोई दूसरा कार्य नहीं हो रहा है।-अजीत भदौरिया, पूर्व ईसी मेंबर व शिकायत कर्ता

जांच कर रहे हैं

– जांच कमेटी में साइंस कॉलेज के प्राचार्य भी हैं। साइंस कॉलेज के प्राचार्य को जांच के स्टेट्स की जानकारी है। शिकायत के बारे में उन्हें ही ज्यादा जानकारी है।-डॉ. सुशीला माहौर, प्रभारी अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा

दस्तावेज देखने के बाद कुछ कह सकेंगे

– आप मुझे दस्तावेज उपलब्ध कराई। उन दस्तावेजों को कुलपित को दिखाने के बाद कुछ कह सकूंगा। कल इस संबंध में बताएंगे।-केशव सिंह, पीआरओ जेयू

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