ग्वालियर
विशेष सत्र न्यायालय ने हरसी हाई लेवल नहर घोटाले के दो आरोपितों के उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिमसें उन्होंने खुद को आरोपों से मुक्त करने की मांग की थी। कोर्ट ने तर्क दिया कि चालान पेश होने से पहले आरोपित सेवानिवृत्त हो चुके थे, इसलिए अभियोजन स्वीकृति की जरूरत नहीं है।
एसएडीओ एके दीक्षित व एमपी जैन ने न्यायालय में एक आवेदन पेश किया। उनकी ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2017 में नई गाइडलाइन बनाई है। जो अधिकारी व कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उनकी भी अभियोजन स्वीकृति जरूरी है। ईओडब्ल्यू ने चालान पेश करने से पहले उनकी अभियोजन स्वीकृति नहीं ली है, इसलिए आरोपों से मुक्त किया जाए। अभियोजन की ओर से आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि वर्ष 2010 में चालान पेश किया गया था। उस वक्त आरोपित सेवानिवृत्त हो चुके थे, इसलिए नया कानून इनके ऊपर लागू नहीं होगा। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आवेदन खारिज कर दिया।
300 करोड़ का है हरसी हाई लेवल नहर घोटाला
-हरसी हाई लेवल नहर घोटाला करीब 300 करोड़ रुपए का है। 47 इंजीनियरों ने मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया था। ईओडब्ल्यू ने मामले की जांच कर वर्ष 2010 में चालान पेश किया था। दो आरोपितों का निधन हो चुका है
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