ग्वालियर-
केंद्र सरकार कीप्रधानमंत्री सौभाग्य योजना में भिंड-मुरैना,ग्वालियर में जमकरभ्रष्टाचार हुआ है। इसकी जांच के लिएप्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने उच्चस्तरीय जांच कमेटी बनाने के आदेश दिए हैं।इस कमेटी में कंपनी के अधिकारियोंके अलावा जनप्रतिनिधि भी शामिल होंगे।अब इस मामले में कंपनी के अधिकारियोंने प्रदेश के ऊर्जा मंत्रालय तक जांच कमेटीपर जोर अजमाइश करना शुरू कर दी है।सौभाग्य योजना में यह प्रदेश का पहलामामला है जिस पर स्वयं ऊर्जा मंत्री नेसंज्ञान लिया है तथा जांच कमेटी बनाने के आदेश दिए हैं। यहमामला भी नहीं खुलता अगर भिण्ड-मुरैना के विधायक ऊर्जामंत्री को इसकी जानकारी नहीं देते। इस योजना में जिले के
ग्रामीण क्षेत्रों के दूर-दराज के क्षेत्रों जिनमें मजरे-टोले तकशामिल हैं वहां विद्युतीकरण करना थी लेकिन विभाग के ठेकेदारोंने अधिकारियों से मिलीभगत कर बिल पास करा कर भुगतानप्राप्त कर लिए और काम नहीं किया। अधिकारियों ने भी झूठीरिपोर्ट बनाकर भोपाल स्थित कंपनी मुयालय को सौंप दी। इसघोटाले में योजना में शामिल भिण्ड-मुरैना जिलों के तत्कालीनअधिकारियों पर गाज गिरना तय बताया जा रहा है।
जांच कमेटी पर टिकी भ्रष्ट अधिकारियों की निगाह
मामला भिंड-मुरैना में प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना में हुए भ्रष्टाचार कामामला
ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह नेउच्च स्तरीय जांच कमेटीबनाने के दिए आदेश
नियम विरुद्ध बनाया डीजीएम
भिंड में सौभाग्य योजना के दोरान एसटीसी संभाग में शुरुआत में एके अष्ठाना डीजीएम केपद पर थे उसके बाद हरीश मेहता पदस्थ थे तथा वर्तमान में श्रीनिवास यादव पदस्थ हैं।
सौभाग्य योजना का क्रियान्वयन एसटीसी संभाग द्वारा किया गया था। तत्कालीन महाप्रबंधकराजीव गुप्ता थे। हरीश मेहता की शुरुआत गोहद सोसायटी में कनिष्ठ यंत्री के रूप में हुईथी। पार्ट टाइम में इन्होंने एमएआईसी पत्रचार से डिग्री की जो बीई के समतुल्य होती है। यहबिजली कंपनी के खिलाफ न्यायालय की शरण में चले गए, वहां से मुकद्मा जीतने पर कंपनीने इन्हें सहायक यंत्री बना दिया था। बिजली कंपनी ने इनके प्रकरण के खिलाफ अपील भीनहीं की जबकि कंपनी छोटे-छोटे प्रकरणों में अपील करती है। परिणामस्वरुप इन्हें पूरीसीनियरटी दे दी गई। इनके सहायक यंत्री बनाने के आदेश में 6 माह का ट्रेनिंग पीरियड था
और दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि शामिल थी। आदेश में यह भी लिखा था कि अगर परिवीक्षाअवधि संतोषजनक नहीं पाई जाती है तो छह माह और बढ़ाई जा सकती है तथा अगर उसकेबाद भी संतोषजनक नहीं रहा तो इनको इनके मूल पद कनिष्ठ यंत्री पर पदस्थ किया जाए।
परिवीक्षा अवधि के दौरान यह श्योपुर में पदस्थ रहे। अवधि खत्म होने से पहले ही ग्वालियररीजन के तत्कालीन मुय महाप्रबंधक एसके सचदेवा ने इनको चालू प्रभार देने की अनुशंसाकंपनी की तत्कालीन मुय महाप्रबंधक मानव संसाधन व सामान्य प्रशासन रूही खान से क रदी और इनको भिंड जिले के एसटीएम संभाग का उपमहाप्रबंधक पद का चालू प्रभार दे दिया
गया। इस मामले में शासन के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई गईं। जिस अधिकारी नेमात्र एक से डेढ़ वर्ष तक सहायक यंत्री के पद पर काम किया हो उसे उपमहाप्रबंधक का चालू
प्रभार दे दिया गया। उस समय वह उपमहाप्रबंधक पद का न तो वेतन ले रहे थे और न हीसहायक यंत्री के पद पर उन्हें पूरे पांच वर्ष हुए थे। जबकि शासन का नियम है कि जब तकएक पद पर अधिकारी पूरे पांच वर्ष नौकरी न कर ले उसे पदोन्नति न दी जाए। इस मामले में
ऊर्जा मंत्री के लिए जांच का विषय यह है कि इस प्रकार हरीश मेहता को कैसे उपमहाप्रबंधकबनाया गया? उसके बाद सौभाग्य योजना की कडिय़ां स्वयं खुलती जाएंगी। –
-मुरैना में यह अधिकारी पदस्थ थे सौभाग्ययोजना के समय
मुरैना जिले में सौभाग्य योजना के दौरान एसटीसी संभाग में चारउपमहाप्रबंधक पदस्थ थे। इनमें शुरुआत से पीएस तोमर, एमएल मिश्रा,
शिवराज दौहरे तथा एसपीएस तोमर शामिल हैं। तत्कालीन महाप्रबंधक विनोदकटारे थे। इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कीगई बताई जाती है।
जांच कमेटी के सदस्यों पर नजर
सूत्रों की मानें तो जिन अफसरों को जांच कमेटी में नियुत किया जाना है उनपर इन अधिकारियों की नजर है। विभाग के यह अधिकारी जो इसमें फंसे हैं
वह अपने मनमाफिक अफसरों को जांच कमेटी में शामिल करने के लिए पूरीताक त लगा रहे हैं, योंकि उन्हें डर है कि अगर उनके फेवर के अधिकारीशामिल नहीं हुए तो उनका बोरिया-बिस्तर समेटना निश्चित है। यह भ्रष्टअधिकारी भोपाल स्थित ऊर्जा विभाग के मंत्रालय तक में सेटिंग लगाने में जुटेबताए जाते हैं।
बढ़ता कारवाँ | समाजवाद की ओर बढ़ते कदम… India's #1 Leading News Portal