भोपाल-फर्जीवाड़ा सरकारी आवास आवंटन में सामने आने के बाद जांच को लेकर जो तेजी दिखाई गई थी वो अब ठंडी पड़ गई है। विभाग ने जांच को पिछले सालों तक ले जाने की प्रक्रिया फिलहाल रोक ली है। बताया जा रहा है कि गृह और संपदा संचालनालय के लिपिकों ने मिलीभगत करके मुख्यमंत्री की फर्जी नोटशीट को आधार बनाकर कई आवंटन किए। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ती तो कई ऐसे कर्मचारियों के नाम सामने आते, जिन्हें फर्जी तरीके से आवास दिए गए थे।
सूत्रों के मुताबिक जुलाई 2018 से नवंबर के बीच गृह विभाग के लिपिक राहुल खरते ने 25 सरकारी कर्मचारियों को जी और एच श्रेणी के आवास आवंटित किए। इसके एवज में 50 हजार से लेकर एक लाख रुपए वसूलने की बात सामने आई है। मुख्यमंत्री की कथित नोटशीट को आधार बनाकर आवंटित गए आवास मामले को देखते हुए गृह विभाग ने पड़ताल की तो आदेश नंबर ही फर्जी निकले।
इसके आधार पर जहांगीराबाद थाने में एफआईआर कराई गई। इसके साथ ही पिछले सालों में आवंटित किए गए आवास के मामलों की जांच कराने का निर्णय लिया गया। फाइलें खंगालने का काम भी शुरू हुआ पर इसे एकाएक रोक दिया गया। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की जांच पुलिस को सौंपी जा चुकी है। अब जांच में जो जानकारी मांगी जाएगी, वह उपलब्ध कराई जाएगी।
एक साथ कई मकान देने के आदेश से हुई शंका
गृह विभाग के अधिकारियों को एक साथ चार आवंटन की फाइल सामने आने पर शंका हुई थी। इसको लेकर उप सचिव आरआर भोंसले ने जब पुराने आदेश मांगे तो पता लगा कि फाइल में उन नंबरों के कोई आदेश ही नहीं है। इस पर आंतरिक पड़ताल की गई और यह सामने आया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से पारी बाहर आवास देने नोटशीट ही नहीं आई थी।
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