ग्वालियर –
साधना को एक शब्द में बयां नहीं किया जा सकता। बात चाहे कला की साधना की हो या फिर शिक्षा की। यह मन से किया जाने वाला रियाज है, जिसकी कोई सीमा और पत्नी उम्र नहीं होती। जब मैं चेन्नई में थी, तब वहां की महिलाएं रोजाना सूरज उगने से पहले उठतीं और अपने घरों की देहरी पर चावल के आटे से कोलम बनाती। यह रंगोली की तरह आकृति होती है। उनकी यह परंपरा किसी एक दिन की नहीं, बल्कि 365 दिन चलने वाली एक प्रक्रिया थी, जिसे मैंने साधना के रूप में देखा और वहीं से मुझे साधना का सही अर्थ पता चला। यही साधना छात्रों को भी अपनी पढ़ाई में करनी चाहिए, तभी जीवन में सफल हाे सकेंगे। यह बात भरतनाट्यम की प्रसिद्ध नृत्यांगना पद्मश्री लीला सैमसन ने कही। वह द सिंधिया स्कूल फाेर्ट में आयोजित 122वें स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहीं थीं। तीन दिवसीय समारोह का समापन हुआ ।
कार्यक्रम में स्कूल के बोर्ड ऑफ गर्वनर के अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मौजूद रहे। स्कूल प्राचार्य डॉ. माधवदेव सारस्वत ने स्कूल की रिपोर्ट पढ़ी।
चिड़िया से सीखें खुद पर भरोसा करना और आगे बढ़ना
तरुण बख्शी को मिला माधव अवाॅर्ड
कार्यक्रम में वार्षिक अवाॅर्ड की घोषणा की गई। इसमें उमंग माथुर मेमोरियल ट्रॉफी आदित्य पाराशर काे, महेंद्र मिश्रा मेमोरियल ट्रॉफी उत्तम राय, महाराजा माधवराव सिंधिया द्वितीय मेडल आदित्य पाराशर, सेमप्रित्रो दा अवाॅर्ड हर्षवर्धन सिंह व देवास करन, आरबी पवार मेडल सक्षम गोयल, गवर्नर्स मेडल ध्रुव पेरीवाल, फील्ड मार्शल करियप्पा शील्ड जिगमी गुरूंग, महाराजा जीवाजीराव सिंधिया मेडल हिमांशु मूजोरिया, खुर्शीद लकड़वाला जूनियर हाउस एफिशिएंसी शील्ड दत्ताजी हाउस, गुरु हरगोविंद सिंह ट्रॉफी शिवाजी हाउस, नेपाल टॉफी जयप्पा हाउस, जनरल एफिशिएंसी शील्ड महादजी हाउस को प्रदान की गई। साथ ही माधव अवार्ड से तरुण बख्शी को सम्मानित किया गया।
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