ग्वालियर-
जमीनों की धोखाधड़ी और भू-माफिया के सर्विलांस का जिला प्रशासन के पास कोई इलाज नहीं है। प्रदेश में जमीन की धोखाधड़ी के मामले में ग्वालियर बदनाम है। सरकारी जमीनों पर किस तरह से कब्जा कर लोगों की मेहनत की कमाई को पचाया जाता है, यह ट्रेंड ग्वालियर में है। करोड़ों के खेल जिला प्रशासन की आंखों के सामने हो जाते हैं, निर्माण एजेंसियां भी मॉनिटरिंग करती हैं लेकिन बाद में लकीर पीटने के अलावा कुछ भी हाथ नहीं रह जाता है। सरकारी जमीनों पर प्लॉटिंग, अवैध कॉलोनियां और बसाहट का सिलसिला ग्वालियर में जारी था और जारी भी है। हाल ही में ग्वालियर कलेक्टर अनुराग चौधरी ने भू-माफिया पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम की कार्रवाई की है, जबकि अभी रासुका के लिए अभी भी लिस्ट लंबी है। नौबत यह है कि जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन में सबसे ज्यादा शिकायत राजस्व यानि जमीनों की धोखाधड़ी की हैं।
जिले में जमीनों की धोखाधड़ी के मामले में निर्माण एजेंसियों से लेकर निजी कॉलोनाइजरों तक से हितग्राही परेशान हैं। यही वजह है कि यहां सभी विभागों में सबसे ज्यादा शिकायतें राजस्व विभाग के पास हैं। जमीनों पर कब्जे, बंटवारा, नामांकन से लेकर धार्मिक स्थलों तक पर विवाद के मामलों के ढ़ेर लगे हुए हैं। इतना ही नहीं बल्कि ग्वालियर विकास प्राधिकरण, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण, मप्र हाउसिंग बोर्ड जैसी निर्माण एजेंसियों से जुड़े मामलों में भी हितग्राहियों को सालों साल चक्कर लगाने होते हैं, यहां भी भू-माफिया अपनी पैठ लगाए बैठे हैं।
ग्वालियरः रेरा की रिपोर्ट में 80 से ज्यादा प्रोजेक्ट अवैध
ग्वालियर में बड़े-छोटे प्रोजेक्टों में अपने घर का सपना दिखाने वाले टाउनशिप प्रोजेक्टों में भी धांधली कम नहीं है। ऑफर में कुछ, मौके पर कुछ और कब्जे के बाद हकीकत कुछ निकलती है। यह ग्वालियर में आमबात हो चुकी है। रियल स्टेट रेग्युलरिटी अथॉरिटी (रेरा) ने हाल ही में अपनी जांच रिपोर्ट में ग्वालियर जिले के 80 प्रोजेक्टों को अवैध बताया है। इसको लेकर नगर निगम कमिश्नर को रिपोर्ट भी दी गई है और पांच-पांच प्रोजेक्टों पर चरणबद्घ तरीके से कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है।
बड़े उदाहरण
-फूटी कॉलोनी में भू-माफियाओं ने सरकारी अमले से सांठगांठ कर यहां सैकड़ों लोगों को जमीन बेच दी, पूरी भूमि सरकारी थी और भू-माफिया बेच भाग गए। हाईकोर्ट में याचिका लगी और सैकड़ों मकानों को बतौर अतिक्रमण हटाया गया।
-अंबेडकर पार्क में 39 आवासों को जमींदोज किया गया। रासुका का आरोपित सुरेंद्र यादव उर्फ बल्ली कमरिया अपने साथियों के साथ यहां निजी भूमि बताकर सरकारी बेच गया था। हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई और सभी आवासों को अतिक्रमण मानते हुए तोड़ दिया गया।
-सिरोल डोंगरपुर पर भी सरकारी जमीन को बेचा गया, सरकारी अमले ने सालों से बनाए गए निर्माणों को तब तो नहीं देखा। अब यहां भी राजस्व ने अतिक्रमणों को हटाया।
-2009 में ग्वालियर विकास प्राधिकरण ने 140 भूखंडों का आवंटन मामा माणिकचंद वाजपेयी पत्रकार कॉलोनी के लिए किया। जमीन की डिक्री राधेलाल नाम के व्यक्ति ने खुद के नाम होना बताया और राजस्व विभाग व जीडीए की लापरवाही से अबतक हितग्राही भटक रहे हैं, यह बड़ा जमीन घोटाला है।
सख्ती से निपटेगा प्रशासन
भू-माफियाओं से प्रशासन सख्ती से निपटेगा। सरकारी जमीन लोगों को बेचकर ठगने सहित कई आपराधिक कृत्य करने वाले आरोपित पर हाल ही में रासुका की कार्रवाई की गई है। इसी तरह सख्त कार्रवाई होगी।
अनुराग चौधरी, कलेक्टर
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