ग्वालियर।
निजी अस्पतालों में इलाज व व्यवस्थाओं की हकीकत सामने आ चुकी है। किसी के जीवन और मौत से इन्हें कोई लेना देना नहीं है,सिर्फ मुनाफ चाहिए। इसी पटरी पर झोलाछाप भी पीछे पीछे लग गए हैं। सीलिंग की कार्रवाई नोटिस, सब हो चुका पर यह झोलाछाप नहीं मानते।
डबरा में भी विभाग की आँखों में धूलझोंककर झोला छाप प्रेक्टिस खुलेआम कर रहे हे
शहर भर में कार्रवाई झेल चुके झोलाछाप अपना ट्रीटमेंट बेखौफ चालू रखे हुए हैं। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग देवकी नंदन अस्पताल जैसे हादसे के बाद भी सबक नहीं ले रहा है। मौजूदा हालात से साफ है कि झोलाछाप डॉक्टरों के यहां पर बड़े हादसे के बाद ही स्वास्थ्य अमला जागेगा।
यह हैं झोला छाप जो बेखौफ फिर जम गए-
1. सुरेन्द्र कुशवाह, झोलाछाप
गोल पहाड़िया पर झोलाछाप डॉक्टरसुरेन्द्र कुशवाह लंबे समय से क्लीनिक संचालित कर रहा था। बीते सप्ताह एसडीएम पुष्पा पुषाम व हेल्थ टीम ने छापेमार कार्रवाई की थी। डॉ सुरेन्द्र कुशवाह तो क्लीनिक से भाग खड़ा हुआ था पर टीम ने क्लीनिक को सील करने की कार्रवाई की थी।
अब सुरेन्द्र कुशवाह ने फिर से अपना कारोबार उसी स्थान पर चालू कर दिया है। जिस क्लीनिक को हेल्थ टीम ने सील किया उसी के सामने स्थित गुर्जर भवन के तलघर में छोटे से कमरे में एक पलंग डालकर बेखौफ मरीज देख रहा है। सुरेन्द्र कुशवाह की क्लीनिक इससे पहले 5 बार सील हो चुकी पर वह हर बार गोल पहाड़िया पर ठिकाना बदलकर काम शुरू कर देता है।
2. मोहम्मद गौरी, झोलाछाप डॉक्टर
एमएच चौराह के पास मुरार में झोलाछाप मोहम्मद गौरी की क्लीनिक है। यहां पर भी 19 अगस्त को एसडीएम पुष्पा पुषाम और सिविल सर्जन डॉ वीके गुप्ता ने कार्रवाई की थी। मोहम्मद गौरी के पास वैद्य विषारद की डिग्री मिली थी। जबकि वह मरीजों की एलोपैथी पद्घति से इलाज करते पाए गए थे। इस पर कार्रवाई करते हुए उनकी क्लीनिक सील कर दी गई थी। पर अब मोहम्मद गौरी ने पुनः उसी क्लीनिक को खोल लिया है और बेधड़क होकर मरीजों को इलाज का इलाज किया जा रहा है। गजब की बात यह है कि इन झोलाछाप डॉक्टरों की करतूतों का पता सभी को है पर बड़े हादसे का इंतजार है।
झोलाछापों की मंडी-
डबरा में भी विभाग की आँखों में धूलझोंककर झोला छाप डॉक्टर प्रेक्टिस खुलेआम कर रहे हे
मुरार नदीपार टाल में ढेरों झोलाछाप डॉक्टर बैठे हुए हैं। कोई एक दो या दस, बीस नहीं बल्की आधा सैंकड़ा से अधिक झोलाछाप डॉक्टरों ने अपनी क्लीनिक खोल रखी है। यहीं पर सर्विलांस वर्कर आईपी निवारिया मरीजों की नब्ज टटोलता मिला था। गजब की बात यह है कि इन झोलाछाप डॉक्टरों की ओर हेल्थ टीम कभी देखती तक नहीं। इन क्लीनिकों से निकलने वाला मेडिकल वेस्ट खुले में फैंककर पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
मैं कार्रवाई करता हूं-
यदि ऐसा है और क्लीनिक संचालित मिली तो मैं इस बार सख्त कार्रवाई करुंगा। झोलाछाप डॉक्टर हो या कोई और गलत काम किसी को नहीं करने दूंगा।
डॉ मृदुल सक्सेना, सीएमएचओ
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