ग्वालियर-
शहर के साथ-साथ पूरे देश में हो रही चेन स्नेचिंग की घटना के पीछे नशा है। युवा नशे पाने के लिए इस तरह की घटना को अंजाम दे रहे हैं। इसके सौदागर अपने थोड़े से आर्थिक लाभ के लिए बचपन से लेकर युवा पीढ़ी को भटकाव की गहरी खाई में धकेल रहे हैं। सभी के सामने एक ही बात आती है, एक बार अगर कसी को नशे की लत लग गई तो संबंधित इंसान ठीक नहीं हो पाता है। यह सोच पूरी तरह से गलत है। गीता को पढ़कर नशे की लत से मुक्ति पाई जा सकती है। यह कहना था एडीजी राजाबाबू सिंह का। वे माधव महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा आयोजित ‘ड्रग्स एक्यूम प्रिवेंशन’ विषय पर रखे गए सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित युवाओं को संबोधित कर रहे थे। सेमिनार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया गया। जिसमें विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. आलोक पुरोहित और रासेयो के समंवयक डॉ. रविकांत अदालतवाले उपस्थित थे। अध्यक्षता प्राचार्य मनोज चतुर्वेदी ने की।
सबसे ज्यादा नशे के युवा शिकार
एडीजी सिंह ने कहा कि नशे की लत में सबसे अधिक युवा फंसे हुए हैं। वे किसी भी मुसीबत से बचने के लिए इसका दामन थाम तो लेते हैं, मगर छुड़ा नहीं पाते। अगर युवा गीता पढ़ेंगे तो उन्हें नशे से बाहर निकलने का मार्ग मिलेगा। गीता में कर्म को प्रधान बताया गया। युवाओं का कॉलेज में किया गया कर्म उनकी दिशा तय करता है। डॉ. मनोज चतुर्वेदी ने कहा कि आर्थिक तंगी , नौकरी की तलाश, असफल प्रेम, मनचाही सफलता न मिलना और परीक्षा में फेल हो जाने पर युवा निराश न हा, बस समाधान खोजें। इस मौके पर डॉ. केके कल्याणकर, डॉ. संजय रस्तोगी, डॉ. शिवकुमार शर्मा, डॉ.मनोज अवस्थी, डॉ. योजना तिवारी, डॉ.संतोष शर्मा, डॉ. संजय गुप्ता, डॉ.निवेदिता पांचाल और डॉ. मंदाकिनी शर्मा उपस्थित थीं।
बढ़ता कारवाँ | समाजवाद की ओर बढ़ते कदम… India's #1 Leading News Portal