ग्वालियर-
डेंगू पिछले 14दिन में शहर के लिए खतरा बन गया है। अक्टूबर में ही 54 मरीज डेंगू पाॅजिटिव हाे गए हैं। शनिवार काे जीआरएमसी के माइक्रो बायोलॉजी विभाग में 54 संदिग्ध मरीजों के सैंपल की जांच में
33 को डेंगू होने की पुष्टि हुई है। इनमें से 17 मरीज ग्वालियर के हैं। इन मरीजों को मिलाकर जिले में डेंगू पीड़ितों की संख्या 76 पहुंच गई है। इनमें से 17 मरीज जिला अस्पताल मुरार के हैं। इससे साफ है कि अगले एक माह में डेंगू का मच्छर सारे शहर काे अपनी चपेट में ले लेगा। वजह ये भी है कि नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इसकी राेकथाम के लिए गंभीर नहीं हैं।
डीडी नगर, गोला का मंदिर जैसे डेंजर जोन के कई क्षेत्रों में फोगिंग तक नहीं हुई है और न ही टीम डेंगू पीड़िताें के घर पर पहुंचकर एंटी लार्वा एक्टिविटी कर रही हैं। डीडी नगर के कुंज बिहार कॉलोनी में दो बच्चों को डेंगू निकला है। इनमें से एक बच्चा डिस्चार्ज होकर घर पहुंच गया है और दूसरा बिड़ला हॉस्पिटल में भर्ती है। कुंज बिहार कॉलोनी के लोगों को कहना है कि उनके यहां आजतक न तो मलेरिया की टीम पहुंची और न ही नगर निगम द्वारा एक भी बार फोगिंग कराई गई।
लापरवाही की दो तस्वीरें… न जल निकासी न अस्पताल में एहतियात
हजीरा स्थित इंटक कार्यालय के बाहर एकत्रित बारिश का पानी जिसमें लार्वा पनप रहा है। दूसरे फोटो में जेएएच में डेंगू के मरीज सामान्य मरीजों के साथ उपचाररत हैं। जेएएच में डेंगू के मरीजों के लिए कहने को तो वार्ड बनाया है लेकिन उन्हें मच्छरदानी नहीं दी गई है।
कब कितने मरीज मिले
मार्च तक 04
जुलाई 01
अगस्त 05
सितंबर 12
अक्टूबर 54
कुल 76
इन 3 विभागाें की लापरवाही से पनप रहा लार्वा
1. नगर निगम: शहर में जगह-जगह जमा बारिश के पानी की निकासी के लिए प्रबंध नहीं किया है। इसके लिए किसी तरह की टीम भी नहीं गठित की है।
2. मलेरिया विभाग: जगह-जगह भरे पानी में लार्वा काे नष्ट करने वाली दवा या गंबूसिया मछली के बीज नहीं डाले हैं। टीम प्रभावित इलाकाें में डाेर टू डाेर एंटी लार्वा एक्टिविटी भी नहीं कर रही है।
3. जिला प्रशासन: कलेक्टर ने मलेरिया अधिकारी की वेतनवृद्धि राेक दी है, लेकिन डेंगू से निपटने के लिए राजस्व अमले और स्वास्थ्य विभाग काे मैदान में नहीं उतारा है।
कलेक्टर की चेतावनी का भी असर नहीं
सितंबर में कलेक्टर अनुराग चौधरी ने सीएमएचओ, नगर निगम और मलेरिया विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर संयुक्त टीम बनाकर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने की बात कही थी। ऐसा न करने पर कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद भी नगर निगम और मलेरिया विभाग की टीम, कुंज बिहार फेस वन, गंगा बिहार, पटेल नगर, खल्लासीपुरा, शिंदे की छावनी सहित कई क्षेत्रों में नहीं पहुंचीं।
आठ दिन में लार्वा बन जाता है मच्छर
डेंगू का मच्छर एक बार में 250 अंडे देता है। पूरे जीवनकाल में तीन बार अंडे देता है। अंडों से दो से तीन दिन में लार्वा निकलता है। चार दिन तक यह बढ़ता है। 12 से 48 घंटे में प्यूपा बन जाता है जो संखी की तरह नजर आता है। इसके 12 से 24 घंटे में मच्छर बनकर उड़ जाता है। डेंगू का मच्छर बन जाता है जो दिन में ही काटता है।
कहां पनपता है लार्वा: डेंगू का लार्वा साफ पानी में ही पनपता है। घर की पानी की टंकी, कूलर, छत या आंगन में पड़े पुराने टायर में जमा पानी, गमले की प्लेट, मनीप्लांट की बोतल, सकोरे, बगीचे के फाउंटेन, फ्रीज के पीछे की ट्रे में जमा पानी, छत पर फालतू पड़े बर्तनों में जमा पानी डेंगू के लार्वा के पनपने के अहम स्थान हैं।
हमारे यहां टीम नहीं अाई
कुंज बिहार के गजेंद्र सिंह भदौरिया के बेटे अभय सिंह को डेंगू निकला और वह बिड़ला हॉस्पिटल में भर्ती है। उनका कहना है कि उनके पड़ोसी आदित्य तोमर को भी डेंगू था। फिर भी उनके क्षेत्र में निगम या मलेरिया विभाग की टीम नहीं आई।
सीधी बात
डॉ.मृदुल सक्सैना, सीएमएचओ
अब जहां डेंगू निकलेगा वहां के मलेरिया वर्कर पर करेंगे कार्रवाई
-हमारी टीम सतत जा रही है। आपने जिन स्थानों का बताया है उस क्षेत्र के मलेरिया अधिकारी को नोटिस जारी कर पूछा जाएगा कि टीम वहां क्यों नहीं गई। इसके अलावा टीम भी भेजी जाएगी।
-जिन क्षेत्रों में डेंगू निकल रहा है वहां पुन: नहीं निकले इसके प्रबंध किए जा रहे हैं। अगर उस क्षेत्र में दोबारा डेंगू निकलता है तो मलेरिया वर्कर पर कार्रवाई की जाएगी। पैथोलॉजी लैब वाले अगर कार्ड टेस्ट लगा रहे हैं तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई करेंगे।
-डेंगू न फैले इसके लिए टीम क्षेत्रों में जा रही हैं। जिन क्षेत्रों में पानी भरने और गंदगी की शिकायत मिलती है उसकी जानकारी नगर निगम को दी जा रही है। जहां अधिक डेंगू निकलेंगे उस क्षेत्र के मलेरिया वर्कर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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