ग्वालियर-
एक साल से बेटी को इंसाफ दिलाने महिला थाना के चक्कर काट रहे पिता ने आखिरकार फांसी लगाकर जान दे दी। महिला थाना पुलिस मामला दर्ज नहीं कर रही थी। हर बार पीड़िता परिवार को सुनवाई के लिए नई तारीख देकर मामले को टाल रही थी। जबकि इस मामले में एसपी ग्वालियर ने भी मामला दर्ज करने के निर्देश दिए थे। घटना रात सत्य नारायण की टेकरी जनकगंज की है। पुलिस ने शव को निगरनी में लेकर डेड हाउस में रखवा दिया है। 3 दिन में पुलिस थानों में पीड़ितों के साथ होने वाले व्यवहार का यह दूसरा नमूना है। इससे पहले जनकगंज पुलिस के कार्रवाई नहीं से दुखी दुष्कर्म पीड़िता ने इसी तरह मौत का रास्ता चुना था। इसमें अभी तक दोषी पुलिस कर्मियों कोई एक्शन नहीं लिया गया।
ग्वालियर पुलिस का एक और कारनामा
– अब महिला थाना प्रभारी पर एक साल से एफआईआर के लिए टहलाने का आरोप
-दहेज प्रताड़ित बेटी को न्याय नहीं दिला पाने से दुखी पिता ने लगाई फांसी
जनकगंज थानाक्षेत्र स्थित सत्य नारायण टेकरी निवासी 60 वर्षीय ब्रह्मजीत शर्मा व उनकी पत्नी सिलाई का काम करते हैं। उनके तीन बेटी व एक बेटा है। फरवरी 2018 में उन्होंने बेटी दिव्या शर्मा की शादी आगरा में योगेश शर्मा से की थी। पर शादी के बाद से ही दिव्या को उसका पति व ससुराल पक्ष परेशान करने लगा। करीब एक साल पहले दिव्या को मारपीट कर घर भेज दिया। तभी दिव्या अपने पिता के साथ महिला थाना पहुंची और शिकायत की। उस समय एसपी ग्वालियर को भी एफआईआर के लिए आवेदन दिया। पर इस मामले में अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं हो सका। बेटी की स्थिति को देखकर ब्रह्मजीत शर्मा दुखी थे। सोमवार को उन्होंने परिवार से नजर बचाकर खुद को कमरे में बंद किया और फांसी लगाकर जान दे दी।
महिला थाना प्रभारी नहीं कर रही थी एफआईआर
मृतक के बेटे पारस शर्मा ने बताया कि एक साल पहले एसपी ग्वालियर को शिकायत की। एसपी ने महिला थाना प्रभारी को मामला दर्ज करने के लिए कहा। महिला थाना पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। जब भी पिता बेटी को लेकर थाना जाते थे तो महिला थाना प्रभारी एफआइआर करने के बदले एक या डेढ़ महीने आगे की तारीख थमा देती थी। जिससे बेटी का पिता खुद ाके अपमानित महसूस कर रहा था।
एक साल में आरोपित पक्ष सिर्फ एक बार आया
महिला थाना में शिकायत करने के बाद पुलिस हर बार नई तारीख यह कहते हुए देती थी कि दूसरे पक्ष को भी बुलाया जाएगा। पर पूरे एक साल में सिर्फ महिला थाना प्रभारी ने एक बार ही दूसरे पक्ष केा बुलाया। उनसे भी खुद बात की और पीड़ित प रिवार को नई तारीख थमा दी।
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