ग्वालियर – भारत विकासशील के नाम का सच ये है कि आज मात्र 9 लोग देश की 50 प्रतिशत आबादी की दौलत समेटे हुए हैं। ऐसे और भी कई दयनीय सच हैं, इन सारी सरकारों के कारण आज मेरा प्रिय भारत खतरे में है, जिसे बचाना अब मेरी प्राथमिकता है।
यह बात आइटीएम न्यूनिवर्सिटी के संस्थापक कुलाधिपति पर से अवकाश लेने के बाद रमाशंकर सिंह ने कही। उनका गरिमामयी पद ग्रहण किया नवनियुक्त कुलाधिपति रुचि सिंह चौहान ने। डॉ. दौलत सिंह चौहान को सम कुलाधिपति पद पर पदारोहण किया गया।
उन्होंने कहा कि 23 साल के सफर में एक पीढ़ी अपनी दूसरी पीढ़ी को तैयार करने के लिए तैयार हो जाती है। मैंने अपने इस 23 साल के कार्यकाल में एक पूरी पीढ़ी का समय निकाला और इस दौरान एक नई पीढ़ी तैयार हो गई, जिन्होंने बहुत ही कुशलता से यूनिवर्सिटी के प्रति अपने कर्तव्यों का बीड़ा उठाया। जब मैं राजनीति में असफल हो गया और मानने लगा कि इसकी राह टेढ़ी और कीच भरी है, जिसे मेरे उसूल कभी नहीं गंवारा करेंगे, तो मैंने इसे छोडऩा ही ठीक समझा। मैंने रंग, राग, साहित्य, संगीत, चित्र की दुनिया से मेल किया।
देश को बचाना मेरी पहली प्राथमिकता : रमाशंकर सिंह ने कहा कि अब मैं किसी राजनीतिक दल में नहीं जाना चाहता, क्योंकि अब मुझे सारे दल एक समान लगते हैं। सत्याग्रह का एक दूसरा सच है ‘मारेंगे नहीं लेकिन मानेंगे भी नहीं’। मैं अब जगह-जगह हो रहे जन आंदोलनों का हिस्सा बन उन्हें तीव्र करूंगा। क्योंकि मैं अपनी पीढ़ी को असुरक्षित भारत में पनपता और जन्मता नहीं देख सकता, क्योंकि मैं भारत से प्यार करता हूं।
जो जिम्मेदारी मिली है उसे बखूबी निभाऊंगी
रुचि सिंह ने कहा कि मैं आज उस पद आसीन हो रही हूं, जिस पर आसीन शख्सियत स्वयं ही उस पद का पूर्ण पूरक है और सर्वोच्च योग्य है। संस्थापक कुलाधिपति से मैंने जिंदगी और कर्तव्यों की हर सीख ली है। मैं आज संस्थापक कुलाधिपति का सेवानिवृत्त हो जाना स्वीकार नहीं करती, क्योंकि वो हमेशा मेरे कुलाधिपति और प्रेरणा स्त्रोत रहेंगे। बदलाव लाने वाले कभी सेवानिवृत्त नहीं होते। आज उनके स्थान पर विराजित होना मेरे लिए बहुत ही असहज क्षण है, लेकिन जिम्मेदारी दी है तो उसे पूरी भी करना है। उन्होंने जो रास्ते बनाए हैं, उन पर चलकर संस्थान को नई दिशा पर ले जाऊंगी।
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