ग्वालियर
बिजली कंपनी के इतिहास में ट्रांसफर और पोस्टिंग के आदेशों को लेकर सितंबर माह बहुत गफलत भरा साबित हो रहा है। ग्रामीण इलाकों को छोड़कर शहरी क्षेत्र में मलाईदार पोस्ट पर आने की सिफारिश लगाने वाले स्टाफ को अफसरों ने ट्रांसफर का लॉलीपॉप पकड़ा दिया। कंपनी ने गत तीन और 12 सितंबर को स्टाफ और इंजीनियरों के ट्रांसफर आदेश जारी किए हैं, लेकिन ये ऑर्डर इतने गोलमोल हैं कि रीजन में बैठे अफसर इनका मतलब ही नहीं समझ पा रहे हैं। एक शिकायत के आधार पर संवाददाता ने मामले की पड़ताल की, तो खुलासा हुआ कि जूनियर और असिस्टेंट इंजीनियरों के तबादले कर उन्हें नई पदस्थापना नहीं दी गई है। इसके स्थान पर ऑर्डर में लिखा है कि शहरी क्षेत्र में जहां जगह खाली हो, वहां इन्हें पदस्थ किया जाए। अब स्थिति यह है कि सिटी सर्किल के सभी पद पहले से ही भरे हुए हैं। दूसरी तरफ करंट चार्ज व्यवस्था को चैलेंज कर रहे एक कोर्ट केस के चलते नए आदेशों में करंट चार्ज पद पर पदस्थ डीजीएम को दोबारा उनका मूल पद दिया गया है, लेकिन शब्दों में फेरबदल कर उन्हें जीएम का एडिशनल चार्ज दे दिया गया है। इससे व्यवस्था पहले जैसी ही बन रही है और सिफारिश कराने वाले इंजीनियर भी आपत्ति दर्ज नहीं करा पा रहे हैं।
ऐसे समझें तबादलों की विसंगति
केस-1
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मोतीझील उपकेंद्र पर तैनात जूनियर इंजीनियर पंकज शर्मा का ट्रांसफर ऑर्डर गत 12 सितंबर को जारी किया गया। इसमें उन्हें अपनी वर्तमान पोस्ट से हटाकर सिटी सर्किल में कहीं भी खाली पड़े जूनियर इंजीनियरके पद पर पदस्थ करने के लिए कहा गया है, जबकि नियमानुसार उनके ऑर्डर में स्पष्ट लिखा जाना था कि उन्हें कहां पोस्टिंग देनी है।
केस-2
भोपाल सिटी सर्किल के जहांगीराबाद जोन में असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर पदस्थ संजय चंदेल का 12 सितंबर को जारी किया गया ट्रांसफर ऑर्डर भी अजीबोगरीब है। उन्हें इस जोन से हटाकर सिटी सर्किल में ही खाली पड़े किसी भी अन्य असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर पदस्थ करने के आदेश जारी किए हैं। सिटी सर्किल में सभी पद भरे हैं और श्री चंदेल के ट्रांसफर पर सिर्फ उन्हीं का जोन खाली होना है।
केस-3
श्योपुर में करंट चार्ज पर जीएम के पद पर पदस्थ डीजीएम दिनेश सुखीजा और गुना में करंट चार्ज पर जीएम बनाए गए डीजीएम श्याम प्रताप दुबे के लिए तीन सितंबर को आदेश जारी किया गया। उन्हें अपने-अपने सर्किल में करंट चार्ज समाप्त कर डीजीएम बना दिया गया, लेकिन साथ ही उन्हें जीएम का एडिशनल चार्ज दे दिया गया। यह सब हाईकोर्ट में चल रहे एक केस के चलते किया गया है।
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