ग्वालियर-
भिंडमुरैना में राजस्थान सीमा से लगे ग्वालियर चंबल संभाग के जिलों में स्थिति खराब हो गई है। भारी बारिश के चलते गांधी सागर बांध के 19 गेट खोलने पड़े, जिससे कोटा बैराज से 9.5 लाख क्यूसेक पानी चंबल में छोड़ा जा रहा है, इससे नदी में बाढ़ आ गई। इस कारण श्योपुर, मुरैना और भिंड जिले में चंबल किनारे बसे 100 से ज्यादा गांव घिर गए हैँ। भिंड और मुरैना में सेना ने रेस्क्यू करके 610 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
मुरैना जिले के ग्राम बरवासीन में चंबल के पानी से धिरे लोगों को नाव से सुरक्षित स्थान पर ले जाते समय नाव एक बिजली के खंबे से टकराकर पलटने से दो मासूम बच्चों की डूबने से मौत हो गई। जोरा विकास खंड का ग्राम बरवासीन चंबल के पानी से घिर गया था। बचाव दल इस गांव से नाव द्वारा 14 लोगों को लेकर सुरक्षित स्थान पर ला रहा था। तभी बिजली की खंबे से टकराकार नाव पलट गई। जिसमें दो बच्चियां दो वर्षीय सुमानी तथा तीन वर्षीय रौनक की पानी में डूबने से मौत हो गई। शेष लोगों को सुरक्षित निकाल रलिया गया है।
श्योपुर और भिंड में सेना ने रेस्क्यू शुरू कर दिया है। करीब 11 गांवों को खाली कराकर अब तक 3 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। सेना और एसडीआरएफ की टीमों ने भिंड जिले के अटेर में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। अटेर के नावली वृंदावन गांव में चंबल नदी का पानी घुस गया है। ऐसे में लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए सेना ने मोर्चा संभाला हुआ है। यहां पर 70 जवानों को भेजा गया है।
कलेक्टर-एसपी ने सेना को हाईरिस्क वाले गांवों का मुआयना करा दिया है, ताकि बाढ के ज्यादा हालात बने तो सेना तत्काल अपना काम शुरू कर देगी। चंबल नदी किनारे के गांवों में बाढ के हालात को देखते हुए कल चंबल रेंज के डीआईजी अशोक गोयल भी भिंड पहुंच गए हैं। उन्होंने भिंड के एएसपी संजीव कंचन के साथ मौके का जायजा लिया है।
पुलिस अधीक्षक रूडोल्फ अल्वारेस ने बताया कि हमारी टीमें लगातार ग्रामीणों के संपर्क में हैं। सभी को सुरक्षति स्थानों पर आने के लिए कहा जा रहा है। चंबल पुल पर भी निगरानी बढ़वा दी है। बाढ़ के हालात को देखते हुए अतिरिक्त बल भी अटेर और सुरपुरा में तैनात किया गया है।
मुरैना, अंबाह और पोरसा के 89 गांव पानी से घिरे
राजस्थान के कोटा बैराज से पानी छोड़े जाने के चलते मध्यप्रदेश के मुरैना में चंबल खतरे के निशान से पांच मीटर ऊपर बह रही है, इसके चलते मुरैना, अंबा और पोरसा के 89 गांव पानी से घिर गए हैं। प्रशासन ने बाढ़ की आशंका के मद्देनजर 35 गांवों को खाली करा लिया गया है। मुरैना में चंबल अपने खतरे के निशान 138 मीटर के मुकाबले पांच मीटर ऊपर 143 मीटर पर बह रही है।
भिंड में खतरे से 3 मीटर ऊपर बह रही नदी
चंबल नदी का जलस्तर खतरे के निशान 122 मीटर से 3 मीटर ऊपर यानी 125 तक पहुंच गया है। बाढ़ के खतरे को देखते हुए अटेर के 5 गांवों से करीब 400 लोगों को बाहर निकाला गया। अटेर में 2 मोटर बोट तैनात की गई हैं।
श्योपुरमें कई गांव बने टापू
श्योपुर की दो प्रमुख नदियां चंबल और पार्वती खतरे के निशान पर हैं। श्योपुर में तो हालात यहां तक बिगड़ गए कि पाली-श्योपुर हाइवे के करीब एक किमी हिस्से की निगरानी के लिए बोट चलानी पड़ी। यहां चंबल नदी का जलस्तर खतरे के निशान तक जा पहुंचा है। सांड, सूंडी और कीर की सांड गांव टापू बने हुए हैं। इनमें से सांड गांव में से 95 को रेस्क्यू टीम ने बाहर निकाल लिया।
मुरैना में 13 साल बाद पुल के ऊपर से पहुंची चंबल
13 साल बाद मुरैना में पुराने राजघाट पुल के ऊपर से चंबल बह रही है। लगातार पानी बढ़ने से चंबल किनारे का गांव महूखेड़ा पानी में डूब गया। हालांकि ग्रामीण पहले ही गांव से निकल आए थे। करीब दो दर्जन गांवों में 5 हजार से अधिक लोग फंसे हुए हैं। चंबल में पानी बढ़ने से उसके किनारे के 89 गांवों में संकट खड़ा हो गया। तीन गांवों के लोग गांव छोड़कर बाहर आ गए।
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