ग्वालियर-
‘तत्काल’ टिकटों से रेलवे को 4 वर्षों में में 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त कमाई हुई है। नई दिल्ली मेतत्काल टिकट स्कीम 1997 में शुरू की गई थी।
2,677 ट्रेनों में तत्काल स्कीम वर्तमान समय में 2,677 ट्रेनों में तत्काल टिकट स्कीम लागू है।
इसका मकसद आखिरी वक्त पर यात्रा का निर्णय लेने वाले यात्रियों को आरक्षण उपलब्ध कराना था। इसकी शुरुआत चुनिंदा ट्रेनों से हुई थी। बाद में 2004 में इस सुविधा का विस्तार सभी मेल एक्सप्रेस ट्रेनों में कर दिया गया था।
इसके अलावा तत्काल प्रीमियम टिकटों से भी रेलवे को 3862 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हुई।
ऐसे हुई इतनी कमाई
रेलवे को 2016 से 2019 के चार वर्षों की अवधि में तत्काल कोटा टिकटों से कुल 21,530 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी हुई। इसके अलावा तत्काल प्रीमियम टिकटों से भी रेलवे को 3862 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हुई। यानी दोनों को मिलाकर रेलवे को तत्काल टिकटों की बिक्री से 25,392 करोड़ रुपये की कमाई हुई।
30 फीसद के बराबर शुल्क
तत्काल कोटे का टिकट बुक कराने वाले यात्रियों से द्वितीय श्रेणी के मामले में बेसिक किराए के 10 फीसद के बराबर, जबकि अन्य श्रेणियों के मामले में बेसिक किराए के 30 फीसद के बराबर तत्काल शुल्क वसूला जाता है। लेकिन इस शुल्क की न्यूनतम और अधिकतम सीमाएं निर्धारित हैं।
चुनिंदा ट्रेनों में हुई थी शुरुआत
2014 से प्रीमियम तत्काल की शुरुआत तत्काल के प्रीमियम वर्जन की शुरुआत 2014 में चुनिंदा ट्रेनों में हुई थी। इसके तहत तत्काल कोटे के पचास फीसद टिकटों की बिक्री डायनामिक किराया प्रणाली के आधार पर की जाती है, जो बुकिंग के साथ बढ़ती जाती है। रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक कुल आरक्षित सीटों 11.57 लाख में से 1.71 लाख टिकटों की बुकिंग तत्काल स्कीम के तहत की जाती है।
6672 करोड़ रुपये का रेवेन्यू

- 2016-17 में तत्काल टिकटों की बिक्री से रेलवे को 6672 करोड़ रुपये का रेवेन्यू प्राप्त हुआ।
- अगले साल यानी 2017-18 में ये बढ़कर 6915 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
- रेलवे को ज्यादा कमाई तत्काल प्रीमियम टिकटों की बिक्री से हुई, जिसमें 2016-17 से 2018-19 के बीच 62 फीसद का उछाल आया और ये 1608 करोड़ रुपये पर पहुंच गई।
बढ़ता कारवाँ | समाजवाद की ओर बढ़ते कदम… India's #1 Leading News Portal