Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /home/sites/43a/e/ed29062570/public_html/wp-content/themes/jarida/functions/common-scripts.php on line 150

संत जीवन से लोगों को परिचित कराना उद्देश्य : आचार्यश्री विशुद्ध सागर महाराज 3 हजार लोग दस दिन कूलर, एसी और पंखे के बिना रहना होगा

भिंड जिले में पहली बार सकल जैन समाज द्वारा 2 सितंबर से 10 दिवसीय आध्यात्मिक श्रावण-साधना संस्कार शिविर आयोजन किया जा रहा है। जिसमें समाज के 3 हजार लोग दस दिन में सांसारिक और भौतिक सुख-सुविधाओं को छोड़कर साधु-संतों की तरह जीवन चर्या करेंगे। जहां पर उनको कूलर, एसी और पंखे के बिना रहना होगा, एक समय का भोजन मिलेगा और चटाई पर शयन करना हाेगा।

आचार्यश्री विशुद्ध सागर महाराज के सानिध्य में 26वां आध्यात्मिक श्रावण-साधना संस्कार शिविर का सोमवार से आयोजन किया जा रहा है, जो 12 सितंबर तक चलेगा। शिविर में शामिल होने के लिए 3 हजार लोगों ने पंजीकरण कराया है।
शिविर के मीडिया प्रभारी अतुल जैन और ऋषभ जैन ने बताया कि आचार्यश्री के सानिध्य में यह 26वां शिविर है। लेकिन भिंड में यह आध्यात्मिक श्रावण-साधना संस्कार शिविर पहली बार होने जा रहा है। शिविर में शामिल होने वाले प्रत्येक व्यक्ति का 1100 रुपए में पंजीयन किया गया है। जिसमें उनको एक किट दी गई। जिसमें उनको दो साड़ी (महिलाओं के लिए), दो धोती(पुरुषों के लिए), दुपट्‌टा आसनी, ग्रंथ, लेखनी, डायरी, माला, पानी के लिए एक केन सहित कुछ अन्य सामग्री दी गई है। जिसका उपयोग वे शिविर में रहकर कर सकेंगे।
साधकों को सुबह 4 बजे जागना होगा : शिविर के दौरान साधकों को सुबह 4 बजे जागना होगा। उसके बाद तय समय पर सभी कार्यों को करना होगा। इस बीच उनको सिर्फ एक बार भोजन करना होगा। शाम के समय खाने में हल्का फलाहार ही कर सकेंगे। इसके अलावा उनको रात के समय बिना कूलर, एसी और पंखे के जमीन पर चटाई बिछाकर सोना होगा। जप-तप भी करना होगा।

संत जीवन से लोगों को परिचित कराना उद्देश्य : आचार्यश्री विशुद्ध सागर महाराज बताते हैं कि इस शिविर काे आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि यहां पर लोग 10 दिन सांसारिक और भौतिक सुख-सुविधाआें को छोड़कर संतों की भांति जीवन को जिएं। जिससे वे जैन संतों के जीवन से परिचित हो सकें। साथ ही उनको पता चले कि संत कैसे जीवन जीते हैं। तप करने में उनको कितनी कठिनाई आती है, इंद्रियों पर किस तरह नियंत्रण रखा जा सकता है।
पयूर्षण पर्व में ही होता है संस्कार शिविर : आचार्यश्री ने बताया कि पयूर्षण पर्व के 10 दिन सबसे पवित्र दिन माने जाते हैं। क्योंकि सृष्टि का जब प्रारंभ हुआ था। उस दौरान देवताओं ने सात दिन तक पृथ्वी पर अमृत की वर्षा की थी, तभी से सकल जैन समाज द्वारा पयूर्षण पर्व मनाया जाता है। इसको दशलक्षण पर्व भी कहा जाता है। जीवन में सुख-शांति के लिए उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, अकिंचन और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

loading...

Warning: Undefined array key "tie_hide_share" in /home/sites/43a/e/ed29062570/public_html/wp-content/themes/jarida/single.php on line 65

Warning: Trying to access array offset on value of type null in /home/sites/43a/e/ed29062570/public_html/wp-content/themes/jarida/single.php on line 65
x

Check Also

जन विश्वास अभियान के तहत कलेक्टर ने किया शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चरगोड़ा का निरीक्षण

रक्षाबंधन पर छात्राओं ने कलेक्टर को बांधी राखी कलेक्टर ने दिया उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद ...