ग्वालियर
बिलौआ थाने में 16 वर्ष पूर्व दर्ज अपहरण के मामले में 6 अारोपियों को सुप्रीम कोर्ट ने विगत दिवस दोष मुक्त करार दिया।

इनआरोपियों को जिला सत्र न्यायालय ने 2004 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अारोपी 13 वर्ष की सजा काट चुके थे। इन आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने जमीन गिरवीं रखने वाले साहूकार के साथ षडयंत्र कर अपहरण के अारोप में गिरफ्तार करने की कहानी रची थी। फिरौती के रूप में 5.45 लाख की जो रकम पुलिस ने बरामद दिखाई थी, वह साहूकार को जमीन मुक्त करने के लिए दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार निर्दोष होते हुए भी षडयंत्र में फंस कर 13 साल जेल काटने आर्थिक व सामाजिक नुकसान की भरपाई के लिए भी दोषमुक्त हुएआ रोपी डैमेज शूट फाइल कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट जस्टिस संजय किशन कोल व जस्टिस केएम जोसेफ की बैंच ने अपहरण के अारोपी जसवंत पाल, रामरस पाल, कल्लू, नवल, दयाराम, बल्लू को उम्र कैद की सजा से दोषमुक्त करार दिया। सुप्रीम कोर्ट ने ग्वालियर हाइकोर्ट की जस्टिस शील नागू व जस्टिस जीएस अहलूवालिया की बैंच के फैसले को बहाल रखते हुएआदेश दिया।
इसआ देश के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी एसएस चौहान, मनोज मिश्रा, एसएस सिकरवार, रमेश डांडे के अलावा अपहृत विक्की उर्फ जयप्रकाश उसके पिता फरियादी विजय चौधरी, शांतिशरण शर्मा, अजय चौधरी, अटल, पुरुषोत्तम व विकास के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई होगी।
यह था मामला: 27 नवंबर 2003 कोआतरी थाने में विजय चौधरी ने अपने नाबालिग पुत्र विक्की उर्फ जयप्रकाश के अपहरण का मामला दर्ज कराया था। इसमें जसवंत, दयाराम व बल्लू कोआरोपी बनाया गया था। पड़ताल के दौरानआरोपियों की संख्या बढ़ा दी गई। इस मामले में विक्की के पिता द्वारा फिरौती की 21 लाख रुपए की चिट्ठी और बाद में 2 दिसंबर को 8 लाख रुपए पहुंचाने की बात भी बताई।
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