बढ़ता कारवाँ/सिंगरौली (जमुना सोनी) बैढन मध्य प्रदेश में जबसे सत्ता परिवर्तन हुआ है तब से सिंगरौली जिले में माहौल बदला हुआ है और यहां तक की कलेक्टर के कार्यालय में इन छुटभैय्ये नेताओं के प्रभाव से अछूता नहीं रहा, जिसका जीता जागता उदाहरण एक कैंसर पीड़िता को लिया जा सकता है।

बताया जाता है कि कैंसर पीड़िता महिला श्रीमती रूपन देवी सिंह पति – राजनाथ सिंह उम्र लगभग 60 वर्ष निवासी- घुरिताल पश्चिम बैढन ने कलेक्टर कार्यालय में अपनी जीवन रक्षा के संबंधित गुहार लगाने के लिए गत मंगलवार की अपरान्ह दो बजे से चार बजे तक व्हील चेयर पर बैठी रही लेकिन कलेक्टर की बेवशी यह थी कि वे पीड़िता से मिल नहीं पाये उन्होंने पीड़िता से मिलने का समय सायं सात बजे का दिया चूंकि पीड़िता की हालत कैंसर के कारण खस्ता हाल है इसलिए वह कलेक्टर साहब केेेे बताये हुये समय पर कलेक्ट्रेट में

बैठकर इंतजार नहीं कर सकी और पीड़िता कैंसर की चौथी स्टेज में पहुंच चुकी है। कैंसर का फैलाव उसकी रीड़ की हड्डी में पहुंच चुका है जिससे उसके दोनो पैर में लकवे की स्थिति बनी हुयी है। परिवार निहायत गरीब है और उसे मदद की अतिआवश्यकता है

गरीब की जमापूंजी पर सोसायटी से कर्ज न मिलने से
वही बताते है जिस गति से सिंगरौली जिला विकास कर रहा है उसी गति से यहां के रहवासी धोखेबाजी, ठगी के शिकार भी हो रहे हैं। पॉवर प्लांट तथा अन्य उद्योगों की सेवा में रत जिला प्रशासन को इस बात की फुर्सत नहीं है कि जिले में रहने वाले गरीब, विस्थापित, किसान किस तरह अपनी जमापूंजी दांव पर लगाकर ठगी का शिकार हो रहे हैं। अवैध रूप से कार्यरत फायनेंस एवं इन्वेस्टमेंट कम्पनियां गरीब सिंगरौली वासियों को लगातार अपना ग्रास बना रही हैं। यदि संख्या देखी जाय तो अवैध रूप से पैसा जमा करवाकर भागने वाली कंपनियों की संख्या एक दर्जन तक पहुंचती है।
कम्पनियों की इसी फेहरिस्त में लोकहित भारती क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड का नाम इन दिनों चर्चाओं में है। भयंकर रूप से कैंसर से पीड़ित महिला रूपन सिंह देवी तथा इनके पति राजनाथ सिंह एवं उनके अन्य परिजनों का लगभग 10 लाख रूपया जमा करवाकर उक्त सोसायटी न तो पैसा वापस कर रही है और ना ही जमा पूंजी पर कर्ज ही देने को तैयार है और राजनाथ सिंह अपनी पत्नी रूपन देवी सिंह के इलाज के लिए बहुत परेशान हैं व दर दर भटकने को मजबूर है ।
उक्त मामले में सबसे सनसनीखेज यह है कि उनका दस लाख रूपया उन्हीं के एक रिश्तेदार ने समझा-बुझाकर उक्त सोसायटी में जमा करवाया था उक्त पैसा संबंधित रिश्तेदार ने डाकघर से निकलवाकर सोसायटी में जमा करवाया है राजनाथ सिंह ने अपनी जमीन बेंचकर उक्त जमा पूंजी अपने व पत्नी की वृद्धावस्था के लिए बचा कर रखी थी। ऐन मौके पर जबकि उन्हें दो लड़कियों की शादी भी करनी है तथा कैंसर से पीड़ित अपनी पत्नी के इलाज के लिये प्रति माह लगभग चालीस से पचास हजार रूपया भी खर्च करना है ऐसे में कम्पनी से उनकी जमा पूंजी का न मिलना उनके लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
अपनी गुहार लगाने के लिये कलेक्टर कार्यालय में दो घण्टे तक बैठी रूपन देवी सिंह अंतत: अपने घर चली गयी और निराश दम्पत्ति को मदद देने वाला कोई भी दिखायी नहीं दे रहा है ।
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