ग्वालियर।
मेडिकल दवाओं की सूची हो या फिर फेल सैंपलों की जांच रिपोर्ट सब गायब है।प्रतिबंधित दवाओं और दवा बिक्रेताओं की कार्य प्रणाली का पता नहीं है। हकीकत में यह सब गायब नहीं है। बल्की विभाग ने ही पर्दे के पीछे रखा हुआ है। चौंकाने की बात यह है कि ड्रग इंस्पेक्टरों के पास इन सबकी फौरी जानकारी तक नहीं है। अब जब इस तरह की स्थिति होगी तो कैसे पता चलेगा कि आम जन को मिलने वाली दवाएं विश्वनीय है अथवा नहीं ।एक ओर खास बात यह है कि पिछले दो साल में एक सिंगल सैंपल फेल नहीं हुआ। ज्ञात रहे कि जिले में स्थित मेडिकल स्टोर से बेची जाने वालीं दवाएं गुणवत्ता पूर्ण हैं तथा वैधानिक रुप से बेची जा रहीं है। इस सब के लिए जिले में दो ड्रग इंस्पेक्टर तैनात किए गए हैं।लेकिन इन ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा पिछले दो साल में लिए गए सैंपल में अधिकांस सरकारी अस्पतालों में बिकने वाली दवाओं के हैं। मेडिकल स्टोर से बेची जाने वाली दवाओं के सैंपल करीब 30 प्रतिशत ही लिए जा सके। सैंपलों की रिपोर्ट या तो ओके मिली या फिर मिली ही नहीं। खास बात यह है कि मेडिकल स्टोर पर गड़बड़ी की शिकायत के लिए आजतक कोई हेल्पलाइन नंबर तक जारी नहीं किया गया, जिस पर आमजन शिकायत कर सकें।
इन बिन्दुओं पर की जाती जांच-
-मेडिकल स्टोर पर बिकने वाली दवा की गुणवत्ता की जांच।
-प्रतिबंधित दवाएं नहीं बेच सकते।
-फिजीशियन सैंपल नहीं बेच सकते।
-खरीद व बिक्री रिकॉर्ड।
-फार्मासिस्ट की देख-रेख में ही खरीद बिक्री की जा सकती।
-मेडिकल स्टोर्स का लायसेंस प्रदर्शित होना चाहिए।
-बिना डॉक्टर की सलाह पर दवाएं नहीं बेच सकते।
इनमें से एक भी बिन्दु का उल्लंघन पर मेडिकल स्टोर संचालक पर जुर्माना, सस्पेंड व लायसेंस निरस्त तक की कार्यवाई की जा सकती है।
ड्रग इंस्पेक्टर का रिपोर्ट कार्ड उनके मुताबिक
जिले में करीब 1200 मेडिकल स्टोर,300 थोक बिक्रेता रजिस्टर्ड बताए गए।
कुल दवाओं के 210 सैंपल लिए गए। जो जांच रिपोर्ट मिलीं वह ओके हैं।
ड्रग इंस्पेक्टर अजय ठाकुर –
ढाई साल में दवाओं के 130 सैंपल लिए गए। अभी 50 सैंपल की रिपोर्ट आना पेडिंग है जिसमें 30 सैंपल सरकारी दवाओं के हैं। अभी तक 500 मेडिकल स्टोर का निरीक्षण कर चुके।40 मेडिकल पर कमी मिलने पर 1 से 7 दिन तक सस्पेंड करने की कार्यवाई की गई।
मेडिकलों पर यह मिलीं खामियां- खरीद-बिक्री का लेखा जोखा ठीक नहीं मिला, फार्मेसिस्ट नहीं मिला, लायसेंस डिस्पले नहीं मिला, एक्सपायरी दवा का स्टोर अलग नहीं था तो कहीं पर फिजीशियन सैंपल रखे मिले। दवाओं की गुणवत्ता व प्रतिबंधित दवाएं नहीं मिलीं।
ड्रग इंस्पेक्टर दिलीप अग्रवाल-
अगस्त 2017 से पोस्टिंग, तब से लेकर अबतक 80 सैंपल लिए। अभी तक केवल 30 सैंपलों की जांच रिपोर्ट मिल सकी। सभी की गुणवत्ता ठीक पाई गई।70 प्रतिशत सैंपल सरकारी अस्पतालों से लिए गए थे। प्रतिमाह 3 मेडिकल स्टोर का निरीक्षण ड्रग इंस्पेक्टर के द्वारा किया गया। कुल कितने निरीक्षण किए इसका डाटा नहीं। कार्यवाई के नाम पर बीते दिनों कलेक्टर के आदेश पर डबरा में एक मेडिकल स्टोर पर की गई।
दवाओं के सैंपल की जांच रिपोर्ट ओके-
प्रतिबंधित दवाओं की सूची अभी नहीं है।अभी तक जितनी भी दवाओं के सैंपल लिए गए उसमें अधिकांश सरकारी दवाओं के हैं। जो जांच रिपोर्ट में दवाओं की गुणवत्ता ओके मिली। मेडिकल पर थोड़ी बहुत कमी मिली तो कार्यवाई की जाती है। कार्यवाई किस किस पर की इसकी भी सूची नहीं है। भोपाल से फोन आता तो हम अपनी रिपोर्ट दे देते हैं , किसी भी अधिकारी का नंबर उनके पास नहीं है।
अजय ठाकुर एवं दिलीप अग्रवाल, ड्रग इंस्पेक्टर ग्वालियर
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