ग्वालियर-
8.28 लाख रुपए कीशिवपुरी लिंक रोड पर लूट के बाद एटीएम में कैश भरने और कलेक्शन का काम कर रही निजी क्षेत्र की पांच कंपनियों की कैश वैन की पड़ताल की तो सुरक्षा में खामियां सामने आ गईं। इन एजेंसियों की 80 कैश वैन रोजाना 60 से 65 करोड़ रुपए लेकर शहर में चल रही हैं। लेकिन सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ एक-एक सुरक्षा गार्ड के भरोसे छोड़ दी है।
शहर में बैंकों के एटीएम में कैश भरने और कलेक्शन की कॉन्ट्रेक्ट पर जिम्मेदारी निजी क्षेत्र की पांच कंपनियों सीएमएस, सिस्को, सिक्योर वैल्यू, एसआईपीएल और राइडर के पास है। इन एजेंसियों की करीब 80 कैश वैन हर दिन 60 से 65 करोड़ रुपए लेकर चलती हैं। शनिवार को हुई घटना में सीएमएस की कैश वैन एचडीएफसी, एक्सिस और यश बैंक का कैश लाने के लिए शिवपुरी लिंक रोड स्थित बैंकों के क्लाइंट प्रेम मोटर्स, बीबीजी और इंस्ट्राकार्ट से कैश कलेक्शन करने गई थी।
50 लाख तक रखा जाता है बंदूकधारी एक गार्ड
जानकारों के अनुसार कैश वैन 50 लाख रु. तक रकम लेकर जाती है या फिर लाती है तो उसके साथ एक बंदूकधारी गार्ड, दो कस्टोडियन और एक ड्राइवर रखा जाता है। यदि रकम 50 लाख रुपए से अधिक है तो उसके साथ दो बंदूकधारी गार्ड, दो कस्टोडियन आैर एक ड्राइवर रहता है।
हर व्यक्ति का रहता है 5 से 10 लाख का बीमा
कैश का परिवहन करने वाली वैन के साथ जो लोग चलते हैं उनमें हरेक का पांच से लेकर दस लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा करवाया जाता है। दुर्घटना घटित होने पर बीमा कंपनी ही भुगतान करती है न कि कैश फीडिंग-कलेक्शन एजेंसी।
लुटेराें के टारगेट पर मनी कलेक्शन एजेंसी, एक साल में चार बड़ी लूट
कैश लाने-ले जाने और भरने का समय निर्धारित
बैंकों द्वारा कैश लाने-ले जाने और उसके कलेक्शन का समय निर्धारित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों के एटीएम और पिक अप पाइंट में कैश भरने और कलेक्शन का समय सुबह 10 से शाम 4 बजे तक निर्धारित है। शहरी क्षेत्रों में सुबह 10 से शाम 5 बजे तक एटीएम में कैश भरा जाता है और पिक अप पाइंट से कैश कलेक्ट किया जाता है।
कहां हुई चूक…गाड़ी में बैठे रहे इसलिए गार्ड को गोली चलाने का मौका नहीं मिला
दुखद…गार्ड पर पूरे घर की थी जिम्मेदारी, पिता की लाश देखकर बेहोश हो गया बेटा
रमेश तोमर निवासी न्यू कांच मिल पिछले 15 साल से सिक्योरिटी गार्ड थे। वह इंदौर की रंजीत सिक्योरिटी एजेंसी के कर्मचारी थे। सीएमएस सिक्योरिटी में रंजीत सिक्योरिटी के ही सिक्योरिटी गार्ड लगे हुए हैं। वह इस कंपनी में पिछले 2 साल से थे। पूरे घर की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। उनका एक बेटा कृपाल मानसिक रूप से बीमार है। जबकि दूसरा बेटा दिलीप प्रायवेट नौकरी करता है। एक बेटी है। पोस्टमार्टम हाउस पर जब उनके बेटे ने उनका शव देखा तो वह बेहोश होकर गिर पड़ा। घर पर उनकी पत्नी और बेटी का रो रोकर बुरा हाल था।
एक भी घटना में आरोपी नहीं पकड़ पाई पुलिस
शनिवार को सिक्याेरिटी एजेंसी के गार्ड की हत्या कर लूट की वारदात इस साल की पहली सबसे बड़ी वारदात है। इससे पहले ढाई महीने में लूट की तीन और वारदात हाे चुकीं हैं। लेकिन सभी वारदातों में पुलिस किसी काे पकड़ नहीं सकी है। लुटेरे पुलिस के लिए चुनौती बन गए हैं। सभी वारदातों में बदमाश काले रंग की बाइक पर ही सवार होकर आए। अधिकांश इस तरह की वारदात मनी कलेक्शन एजेंसी के कर्मचारियों के साथ हुई है।
प्रभारी एसपी सुरक्षा को लेकर आज लेंगे सिक्योरिटी एजेंसियों की बैठक
लगातार मनी कलेक्शन एजेंसी के कर्मचारियों के साथ हो रही इन वारदातों के बाद पुलिस अफसर चिंतित हैं। आईजी राजाबाबू सिंह ने प्रभारी एसपी अमन सिंह राठौड़ को निर्देशित किया है कि वह रविवार को शहर की सभी सिक्योरिटी एजेंसी और मनी कलेक्शन एजेंसी के अधिकारियों के साथ बैठक करें। बैठक में उन्हें कैश वैन में सुरक्षा के इंतजाम बढ़ाने के साथ सिक्योरिटी गार्डों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करने के निर्देश दिए जाएंगे।
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