ग्वालियर-
मुरार नदी से अतिक्रमण हटाने जिला और निगम प्रशासन की कार्रवाई दूसरे दिन शुक्रवार को भी विवादों में घिरी रही। मदाखलत टीमों को लेकर अधिकारी अतिक्रमण हटाने पहुंचे, लेकिन उन्होंने पाटौर का मलबा हटाने में ही पूरा दिन बिता दिया। अधिकारी कालपी ब्रिज के पास बने होटल तक भी पहुंचे, लेकिन एक-दूसरे पर मामला टाल कर लौट गए। अतिक्रमण की जद में आए रसूखदारों को बचाने पर भेदभाव के आरोप लगने लगे हैं। वहीं विधायक मुन्नाालाल गोयल सभी अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई का केवल भरोसा ही दे रहे हैं।

दिखावे के लिए ले गए जेसीबी
टीम ने शहीद गेट के पास नदी क्षेत्र में बने केवल दो मकान तोड़े थे। शुक्रवार को अमला फिर वहां पहुंचा और केवल मलवा भरने में ही लगा रहा।
इसी बीच नगर निगम के ग्वालियर पूर्व क्षेत्र के उपायुक्त एपीएस भदौरिया तथा भवन अधिकारी सतेन्द्र यादव कालपी ब्रिज के पास बने होटल पर पहुंच गए। वे होटल के पास अवैध कब्जे की जानकारी ले रहे थे। जिला प्रशासन के अधिकारियों को सूचना मिली की विधायक गोयल भी होटल पहुंच गए हैं। वहां बैठक चल रही है, हालांकि वहां विधायक नहीं थे। एसडीएम पुष्पा पुषाम व तहसीलदार नरेश गुप्ता मलवा हटाने वाले स्थान पर थे। थोड़ी देर में वे भी होटल पहुंच गए। दोनों अधिकारी नदी क्षेत्र में अतिक्रमण वाले स्थान पर निरीक्षण करने पहुंचे। उनके पहुंचने से पहले ही उपायुक्त भदौरिया वहां से चले गए। इससे मामला संदिग्ध हो गया।
एसडीएम बोलीं- फिर हमें क्यों बुलाया
एसडीएम ने भवन अधिकारी से अतिक्रमण की जानकारी मांगी तो यादव ने कहा कि यह राजस्व का मामला है। होटल संचालक ने कहा कि न होटल अतिक्रमण में है और न उससे सटी जमीन। हां, कुछ हिस्सा हो सकता है, जिसे यदि चि-ति कर दिया जाए तो वे स्वयं जालियां हटा लेंगे। एसडीएम व भवन अधिकारी ने होटल संचालक को बताया कि नदी के चैनल(पुल के नीचे पानी निकले का स्थान) को देखने से खाली जमीन पर अतिक्रमण नजर आ रहा है। अधिकारी काफी देर तक यह तय नहीं कर सके कि उसे नाप कराएं या नहीं। भवन अधिकारी ने कहा कि सिटी प्लानर और सहायक सिटी प्लानर को बुलाकर मामला दिखवा लेंगे। इस पर एसडीएम बोलीं कि जब कार्रवाई ही नहीं करनी तो हमें क्यों बुलाया है। इस पर तहसीलदार व निगम अधिकारी एक-दूसरे पर मामला टालते रहे और आखिर बिना कोई निर्णय के वे लौट गए।
भवन निर्माण मंजूरी पर सवाल
कालपी ब्रिज के पास होटल सहित नदी किनारे कई मकानों को नगर निगम ने मंजूरी दी है। होटल के पास पहुंचे अधिकारियों ने चर्चा में बताया कि तत्कालीन भवन अधिकारी महेन्द्र अग्रवाल (अब सहायक सिटी प्लानर) के समय निर्माण की मंजूरी दी गई। सवाल खड़े हुए कि क्या उस समय जिला प्रशासन ने उसे निजी जमीन माना था?, यदि माना था तो आज अतिक्रमण कैसे कहा जा रहा है। अधिकारियों के पास इसका जवाब नहीं था।
बड़ी संख्या में रसूखदारों का अतिक्रमण
नदी की जमीन पर अवैध कॉलोनी निर्माण, स्कूल और होटल बने हैं। बुधवार को विधायक मुन्नाालाल गोयल के साथ जिला व पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने हुरावली से कालपी ब्रिज तक चार किलोमीटर पैदल निरीक्षण किया था। इस दौरान यह अतिक्रमण देखने को मिले। विधायक ने अतिक्रमण हटाने के निर्देश देते हुए नदी के सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव बनाने को कहा था। गुरुवार को जिला प्रशासन के नेतृत्व में निगम अमला दो-तीन कच्चे मकान तोड़कर लौट आया था। केवल गरीबों के आशियाने ही तोड़ने पर विरोध भी हुआ।
इनका कहना है
होटल के पास की जमीन पर कितना अतिक्रमण है, यह राजस्व विभाग के सर्वे से पता चलेगा। मौके पर हालात देखने से कुछ हिस्से पर अतिक्रमण दिख रहा है। हमने उसे हटाने को कहा है।
एपीएस भदौरिया, उपायुक्त ननि
नहीं होगा भेदभाव
तोड़फोड़ की कार्रवाई में कोई भेदभाव नहीं होगा। मैं इसकी नियमित मॉनीटरिंग कर रहा हूं। कलेक्टर से भी कह दिया है कि कार्रवाई में समानता रखी जाना चाहिए।
मुन्नाालाल गोयल, विधायक
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