ग्वालियर -शातिर ठग ओएलएक्स जैसे ऑनलाइन सेलिंग प्लेटफॉर्म पर नजर रखकर लोगों का सामान खरीदने के लिए कॉल करते हैं और फिर नगद भुगतान या ऑनलाइन ट्रांसफर के बजाय यूपीआई नंबर लेकर ठगी कर रहे हैं
सिटी सेंटर निवासी चंद्रेश सोनी ने एसयूवी स्कॉर्पियो को बेचने के लिए ओएलएक्स पर एड डाला था। गत 20 मई को उनके फोन पर 9837336974 नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने गाड़ी पसंद होने की बात कहकर 50 हजार रुपए एडवांस देने के लिए श्री सोनी से गूगल पे का नंबर पूछा और एक लिंक भेजकर उनके खाते से तीन बार में 31 हजार रुपए निकाल लिए।
अपने उपयोग किए हुए सामान को ओएलएक्स जैसी वेबसाइट्स पर बेचने वाले लोग शातिर ठगों का शिकार हो रहे हैं। ये ठग सामान खरीदने के लिए लोगों को मोटी रकम का लालच देकर उनसे यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) नंबर पूछकर उस पर क्रेडिट के बजाय डेबिट लिंक भेजते हैं और जैसे ही व्यक्ति इसे एसेप्ट करता है, उसके खाते से पैसा निकल जाता है। पिछले दो माह में साइबर क्राइम थाने में ऐसी आधा दर्जन से अधिक शिकायतें पहुंची हैं।
ठगों के निशाने पर ओएलएक्स: पिछले दो माह में आधा दर्जन से अधिक लोग हुए इस रैकेट के शिकार
केस-1
ग्वालियर
शातिर ठग ओएलएक्स जैसे ऑनलाइन सेलिंग प्लेटफॉर्म पर नजर रखकर लोगों का सामान खरीदने के लिए कॉल करते हैं और फिर नगद भुगतान या ऑनलाइन ट्रांसफर के बजाय यूपीआई नंबर लेकर ठगी कर रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में वे यूपीआई से पैसा क्रेडिट करने के बजाय डेबिट की लिंक भेजते हैं। आमतौर पर लोग इस पर ध्यान नहीं देते हैं और लिंक पर क्लिक कर इसे स्वीकार कर लेते हैं। इससे उनके खाते से पैसा निकल जाता है। डीबी स्टार टीम ने इस मामले का पैरलल इंवेस्टीगेशन किया, तो खुलासा हुआ कि यूपीआई से ठगी होने की स्थिति में पुलिस को इसे ट्रेस करने में थोड़ा समय लगता है, क्योंकि ये कंपनियां आसानी से डाटा शेयर नहीं करती हैं। जब तक पुलिस को डाटा मिल पाता है, तब तक ये पैसा दूसरे खातों में ट्रांसफर कर निकाल लिया जाता है।
केस-2
हरीशंकरपुरम निवासी हेमंत चांदिल ने साइकिलों की बिक्री के लिए वेबसाइट्स पर फोटो डाले थे। उनके पास 12 अप्रैल को मोबाइल नंबर 7419071437 से कॉल आया। कॉलर ने स्वयं को आर्मी मैन बताते हुए पेमेंट करने के लिए फोन-पे नंबर मांगा। इसके बाद उन्हें पेमेंट स्वीकार करने के लिए लिंक भेजी। इसे ओके करते ही उनके अकाउंट से दो बार में 6500-6500 रुपए कट गए।
मामला ट्रेस कर रहे हैं
गूगल-पे और अन्य यूपीआई से धोखाधड़ी की शिकायतें हमारे पास आई हैं। हम इन शिकायतों के आधार पर मामले को ट्रेस कर रहे हैं। अभी इन प्रकरणों में विवेचना चल रही है, इस कारण ज्यादा जानकारी नहीं दे सकते हैं, लेकिन जल्द ही हम ठगों का पता लगा लेंगे। सुधीर अग्रवाल, एसपी राज्य साइबर क्राइम
केस-3
गोविंदपुरी निवासी पुनीत कालरा ने ओएलएक्स वेबसाइट पर अपनी वॉशिंग मशीन बेचने के लिए एड डाला था। गत 12 मई को उनके पास मोबाइल नंबर 8738049723 से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने चार हजार रुपए में मशीन खरीदने का ऑफर दिया और गूगल-पे नंबर पूछकर लिंक भेजी। इस पर क्लिक करते ही पुनीत के खाते से 23500 रुपए कट गए।
मथुरा के पास के गांवों में क्लू
साइबर क्राइम पुलिस द्वारा ऐसे मामलों में तफ्तीश में यह निकलकर सामने आया है कि ठगी का यह गिरोह अब कोलकाता, झारखंड, बिहार या दिल्ली से ऑपरेट नहीं हो रहा है। अब पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के मथुरा व वृंदावन इलाकों के पास इन ठगों के क्लू मिले हैं। इसका कारण यह है कि इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा टेलीकॉम कंपनियों के टॉवर हैं, जो दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्यप्रदेश के कई इलाकों को सर्विस देते हैं। यहां से ये ठग नेटवर्क हैकिंग का उपयोग कर फोन करते हैं।
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