ग्वालियर
जुलाई 2018 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का एक कार्यक्रम शिवपुरी के पास पिछोर में आयोजित किया गया था। हितग्राहियों को इस कार्यक्रम में लाने के लिए वाहनों की व्यवस्था का जिम्मा परिवहन कार्यालय को मिला था।
कमीशन के खेल में किया एजेंट को 16 लाख का भुगतान
एआरटीओ रिंकू शर्मा ने आरटीओ एजेंट अशोक नागपाल को बस संचालकों का प्रतिनिधि बताते हुए उन्हें बसों का इंतजाम करने के लिए 16 लाख रुपए का अग्रिम भुगतान करा दिया। जबकि अग्रिम भुुगतान के लिए शासन के िकसी भी विभाग में प्रावधान नहीं है। यदि किसी विभाग को अग्रिम भुगतान करना है तो उसके लिए राज्य शासन के वित्त विभाग की अनुमति लेना अवश्य है लेकिन इस मामले में कोई अनुमति नहीं ली गई।
अन्य के खाते में पैसा नहीं
शासन ने वर्ष 2014-2015 से ही दलाल या किसी दूसरे व्यक्ति को भुगतान पर रोक है। यह पैसा सीधा हितग्राही के खाते में ट्रांसफर किया जाता है, लेकिन इस मामले में 200 बसों की व्यवस्था अशोक नागपाल द्वारा करना दर्शाया गया है। अब अधिकारी कह रहे हैं कि यदि बस मालिक कहता है कि यह हमारे प्रतिनिधि हैं तो वह प्रतिनिधि को भुगतान कर सकते हैं। किसी नियम के तहत कर सकते हैं इस बात का कोई जवाब नहीं दे रहा।
प्रशासन करे कार्रवाई
आरटीओ का काम सिर्फ प्रशासन के आदेश पर बसें मुहैया कराना होता है। इसके बाद प्रशासन द्वारा ही संबंधित विभाग के माध्यम से बस ऑपरेटरों को भुगतान कराया जाता है। इस प्रकरण में प्रशासन को जांच करानी चाहिए और अगर हमारा कोई अफसर दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। डॉ. शैलेंद्र श्रीवास्तव, परिवहन आयुक्त मप्र
हम प्रतिनिधि को कर सकते हैं भुगतान
रिंकू शर्मा, एआरटीओ
हां सीएम का कार्यक्रम था उसके लिए दिया गया था।
हां, दरअसल बस ऑपरेटर एक प्रतिनिधि नियुक्त कर देते हैं।
हमारे यहां एक्ट में है, हम एडवांस पेमेंट कर सकते हैं।
नहीं, हम प्रतिनिधि को भी कर सकते हैं।
चार लाख और लेने हैं
सीएम के कार्यक्रम के लिए मुझे बसें अरेंज करने की जिम्मेदारी दी थी। इस काम के लिए मैंने 20 लाख रुपए एडवांस मांगे थे, जिसमें से 16 लाख रुपए मिले हैं। अभी चार लाख और लेना है। अशोक नागपाल, एजेंट
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