ग्वालियर- बदबूदार और पीले पानी की समस्या का समाधान तलाशने के लिए कराई गई पानी के सैंपलों की जांच रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड द्वारा की गई इस जांच के दौरान पानी में पाए गए तत्वों के आधार पर यह स्पष्ट है कि तिघरा जलाशय से फिल्टर प्लांटों में साफ करने के बाद सप्लाई किया जा रहा पानी भी पीने योग्य नहीं है।

प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के विशेषज्ञों ने शनिवार को निगम के तीनों फिल्टर प्लांटों से सप्लाई होने वाले पानी के सैंपल लिए थे। जांच में स्पष्ट हुआ कि पानी में बड़ी मात्रा में कॉलीफार्म बैक्टीरिया है जबकि इस बैक्टीरिया की उपस्थिति मात्र ही पानी को प्रदूषित कर देती है। वहीं केमिकल आक्सीजन डिमांड (सीओडी) की मात्रा भी निर्धारित मानक (0) से कहीं ज्यादा पाई गई यानी पानी में प्रदूषित तत्वों की अधिकता है।
: गंदा पानी पिलाने वालों की सजा तय हो
पत्रकार शहर में पीले और बदबूदार पानी की सप्लाई की कलई खोलते आ रहे लेकिन नगर निगम के अफसर यह कहकर अपना दामन बचाते रहे कि उनके फिल्टर प्लांट और टंकियों से तो साफ पानी ही सप्लाई किया जा रहा है। सोमवार को पानी की वह गोपनीय जांच रिपोर्ट हासिल हो गई जिसमें गंदे और प्रदूषित पानी की सप्लाई की पुष्टि हो रही है।
यह रिपोर्ट बताती है कि पानी में कई गुना ज्यादा गंदगी घुली हुई है। यह रिपोर्ट आने के कुछ ही घंटे पहले खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने शहर में घूमकर लोगों को वितरित हो रही गंदे पानी को प्रत्यक्ष देखा था। अब कलेक्टर और संभागीय कमिश्नर को ही आगे आकर जनता को गंदा पानी पिलाने वाले अफसरों को चिन्हित कर उन पर सख्त कार्रवाई करनी होगी।
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