ग्वालियर-
किसानों को अनाज का उचित दाम मिल सके, इसलिए खरीद केन्द्रों पर समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदा जा रहा है। लेकिन यहां पर दलालों ने पैर जमा रखे हैं। दलाल अपंजीकृत किसानों से सस्ते दाम पर अनाज की खरीदी कर रहे हैं और खरीद केन्द्रों पर सांठगांठ कर समर्थन मूल्य पर बेचकर शासन को चूना लगा रहे हैं। लेकिन खरीद केन्द्र प्रभारी से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से यह गोरख धंधा फलफूल रहा है। खरीद केन्द्रों पर पंजीकृत किसानों के अनाज की बाद में पहले दलालों के माल की तुलाई होती है।

स्थानः निर्माणाधीन लक्ष्मीगंज सब्जी मंडी
केन्द्र का नामः तिघरा खरीद केन्द्र
समयः दोपहर साढ़े 3 बजे
खरीद केन्द्र पर तुलाई बंद थी। वहां पर ट्रॉलियों में अनाज भरे खड़े किसानों से बात की तो पता चला कि सुबह से महज 6 से 7 ट्रॉलियों की ही तुलाई हुई है। लेबर ट्रकों में माल भरने में लगी है जब फ्री होगी तब तुलाई शुरू हो सकेगी। इसी बीच वहां पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हिम्मतगढ़ निवासी लाखन सिंह से जब पंजीयन दिखाने के लिए कहा तो उसने कहा कि पंजीयन नहीं है। उसके अनाज का तो सौदा हो चुका है और वह ट्रॉली की तुलाई भी मंडी में करवा आया है। जिसने ट्रॉली खरीदी उसका नंबर भी उसने दिया, नंबर बंटी ककरधा का था। जब संवाददाता ने किसान बनकर बंटी से बात की तो उसने बताया कि उसका साला चेन सिंह मंडी सेक्रेट्री दुबे के साथ काम करता है। उसके माध्यम से वह अब तक 1700 रुपए के हिसाब से 1400 क्विंटल गेहूं बेच चुका है। पिछले दो दिन से मंडी का भाव बढ़ने पर खरीद केन्द्र वालों ने भी 50 रुपए का भाव बढ़ दिया है। बंटी ने किसान बनकर बात कर रहेसंवाददाता से भी कहा कि क्या आपको भी गेहूं बेचना है तो बताएं मैं बिकवा दूंगा।
मंडी में नहीं खाने पीने व बैठने की व्यवस्था-
दीनारपुर मंडी से लेकर लक्ष्मीगंज गल्ला मंडी में किसानों के लिए खाने-पीने व छांव में बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। अभी तक 5 रुपए में किसानों को भोजन उपलब्ध करवाया जाता था लेकिन अब नहीं दिया जाता। मंडी में बने टीन शेड में व्यापारियों ने कब्जा जमा रखा है।
लक्ष्मीगंज मंडी में स्थित कैन्टीन संचालक रमेश कुशवाह कांग्रेस सरकार को कोस रहे थे, उनका कहना था कि किसानों को भोजन देने के लिए मंडी सचिव ने कहा ही नहीं। दीनारपुर मंडी में स्थित कैन्टीन संचालक हरि शर्मा का कहना था कि पर्ची पर भी पूड़ी सब्जी देते पर मंडी में किसानों को पर्ची दी ही नहीं जाती।
वर्जन-
मंडी में पहुंचने वाले किसानों के लिए भोजन की व्यवस्था कैंटीन में है। यदि नहीं हैं तो मैं कल आकर देखता हूं, अभी मैं बाहर हूं।
देवेन्द्र जादौन, मंडी सचिव
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