ग्वालियर
राहत के लिए हाईकोर्ट पहुंची श्रीराम बिहारी सोनी जनकल्याण शिक्षा समिति को कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए पीड़ित छात्रों को 10-10 हजार रुपए बतौर क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। जस्टिस शील नागू ने कहा कि समिति का आचरण ऐसा नहीं है कि उसके साथ कोई सहानुभूति दिखाई जाए। समिति साफ मंशा से कोर्ट में नहीं आई, इसलिए याचिका खारिज की जाती है।
दरअसल, श्रीराम बिहारी सोनी जनकल्याण शिक्षा समिति ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसमें मांग की गई कि वह जीवाजी विश्वविद्यालय को समिति द्वारा संचालित श्रीराम कॅालेज आॅफ मैनेजमेंट एंड साइंस के बीए, बीएससी के प्रथम, द्वितीय व अंतिम वर्ष (सत्र 2014-15, 2015-16) के 32 छात्रों की अंकसूची जारी करने के लिए निर्देशित करें।
विवि के वकील दीपक खोत ने कोर्ट को बताया कि कॉलेज को वर्ष 2014-15 में विश्वविद्यालय से संबद्धता मिली थी लेकिन अगले सत्र में संबद्धता नहीं मिल पाई, क्योंकि कॉलेज ने शिक्षकों की नियुक्ति नियमानुसार नहीं की थी। विश्वविद्यालय के इस फैसले को कॅालेज ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जिसमें कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में सक्षम अधिकारी गुण-दोष के आधार पर निर्णय लें। इसके बाद कॉलेज ने विश्वविद्यालय से संपर्क नहीं साधा। बच्चों का भविष्य खराब न हो, इसे ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने उन्हें क्षत्रपाल शासकीय काॅलेज, पिछोर में स्थानांतरित कर दिया। ऐसे में कॉलेज को याचिका दायर करने का अधिकार ही नहीं है। उनके तर्क से सहमति जताते हुए कोर्ट ने राहत देने से मना कर दिया और समिति को निर्देश दिया कि वह विश्वविद्यालय के खाते में क्षतिपूर्ति की राशि जमा कराए। विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि वह उन छात्रों को चिह्नित करें, जिन्हें शासकीय कॉलेज में स्थानांतरित किया गया है और उनके खाते में क्षतिपूर्ति राशि पहुंचाएं।
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